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Up Kiran, Digital Desk: कर्नाटक के चित्तपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का प्रस्तावित मार्च आखिरकार प्रशासन द्वारा रद्द कर दिया गया है। यह कदम जिला प्रशासन ने कानून-व्यवस्था की संभावित गड़बड़ी की आशंका को ध्यान में रखते हुए उठाया है।

चित्तपुर के अधिकारियों ने बताया कि इसी दिन भीम आर्मी और भारतीय दलित पैंथर्स ने भी उसी मार्ग पर मार्च निकालने की अनुमति मांगी थी। ऐसे में एक ही दिन तीन संगठनों के मार्च को लेकर सुरक्षा व्यवस्था पर भारी दबाव था।

इस दौरान प्रशासन ने आरएसएस द्वारा लगाए गए पोस्टर और कटआउट भी हटवा दिए हैं, क्योंकि उन्हें पुलिस की औपचारिक अनुमति के बिना लगाया गया था।

गौरतलब है कि चित्तपुर वही इलाका है, जहां से कर्नाटक सरकार में मंत्री प्रियांक खड़गे विधायक हैं।

अधिकारियों ने क्या कहा?

18 अक्टूबर को जारी आधिकारिक आदेश में प्रशासन ने स्पष्ट किया कि एक ही दिन में तीन संगठनों के मार्च की इजाजत देना जोखिम भरा हो सकता है।

आदेश के अनुसार: चित्तपुर की शांति और सामाजिक सौहार्द को बनाए रखने के लिए 19 अक्टूबर को आरएसएस के रूट मार्च की अनुमति नहीं दी जाती। भीम आर्मी और दलित पैंथर्स द्वारा भी मार्च की अनुमति मांगी गई है, जिससे किसी भी अप्रिय स्थिति की आशंका है।

हाईकोर्ट का हस्तक्षेप

इस मामले में कर्नाटक उच्च न्यायालय ने प्रशासन की भूमिका पर ध्यान देते हुए निर्देश दिया कि यदि सभी पक्ष मार्च करना चाहते हैं, तो उन्हें अलग-अलग समय दिए जाएं। साथ ही अदालत ने याचिकाकर्ताओं को सलाह दी कि वे संशोधित रूट प्लान के साथ जिला प्रशासन के पास नई याचिका दायर करें।

राजनीतिक बयानबाज़ी भी शुरू

भारतीय जनता पार्टी ने आरएसएस के मार्च को रोके जाने पर राज्य सरकार को घेरते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी है। कर्नाटक भाजपा अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र ने इस निर्णय की तुलना उत्तर कोरिया के तानाशाही शासन से कर दी।

विजयेंद्र ने कहा कि कांग्रेस सरकार चित्तपुर में ऐसा माहौल बना रही है जो लोकतंत्र का मज़ाक उड़ाता है। अगर ऐसी ही बंदिशें हर जगह लगाई गईं, तो राज्य में कोई भी सांस्कृतिक या देशभक्ति कार्यक्रम करना मुश्किल हो जाएगा।