Up Kiran, Digital Desk: पंजाबी सिनेमा के सुपरस्टार दिलजीत दौसांझ की हाल ही में रिलीज़ हुई फिल्म 'बाबे भांगड़ा पौंदे ने' एक कॉमेडी और रहस्य (व्होडनिट) का मिश्रण पेश करने का प्रयास करती है। अमरजीत सिंह द्वारा निर्देशित इस फिल्म में दिलजीत दौसांझ मुख्य भूमिका में हैं, और उनकी परफॉर्मेंस फिल्म की सबसे बड़ी ताकत साबित होती है।
कहानी:
फिल्म की कहानी तीन दोस्तों - जग्गी (दिलजीत दौसांझ), छिंदा (संगतारा) और भोलू (गुरप्रीत घूगी) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो जल्दी अमीर बनने का सपना देखते हैं। उनका विचार कनाडा में एक बीमार बुजुर्ग महिला से विरासत प्राप्त करना है। इस योजना के तहत वे 'भांगड़ा पेपौ' नामक एक भांगड़ा समूह बनाते हैं। कहानी में एक रहस्य का पुट भी जोड़ा गया है, लेकिन यहीं फिल्म लड़खड़ा जाती है।
क्या अच्छा है:
फिल्म की सबसे बड़ी खासियत निश्चित रूप से दिलजीत दौसांझ हैं। उनकी कॉमिक टाइमिंग, चेहरे के हाव-भाव और जबरदस्त ऊर्जा दर्शकों को शुरू से अंत तक बांधे रखती है। वह अकेले ही कई दृश्यों को मनोरंजक बनाते हैं। तीनों दोस्तों (दिलजीत, संगतारा और घूगी) के बीच की केमिस्ट्री भी शानदार है, जो कुछ हंसी के पल पैदा करती है। फिल्म का शुरुआती हिस्सा कुछ हद तक दर्शकों को आकर्षित करने में सफल रहता है।
क्या अच्छा नहीं है:
फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी इसका रहस्य वाला पहलू है। 'व्होडनिट' का प्रयास बहुत प्रभावी नहीं है और रहस्य पूरी तरह से फीका लगता है। पटकथा कमज़ोर है और अप्रत्याशित मोड़ों की कमी है, जिससे कहानी काफी हद तक अनुमान लगाने योग्य हो जाती है।
सहयोगी किरदारों को पर्याप्त गहराई नहीं दी गई है, जिससे वे यादगार नहीं बन पाते। फिल्म की गति धीमी है और बीच-बीच में बोरिंग भी हो जाती है। इसके संगीत में भी कोई खास दम नहीं है, और कोई भी गाना यादगार नहीं है। क्लाइमेक्स बहुत जल्दबाजी में खत्म होता है और संतोषजनक नहीं लगता।
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