Up kiran,Digital Desk : उत्तर प्रदेश की एक यूनिवर्सिटी पर देश के सबसे बड़े फर्जी डिग्री घोटालों में से एक का दाग लगा है। हापुड़ की मोनाड यूनिवर्सिटी से जारी हुईं डिग्रियों पर अब यूपी एसटीएफ की जांच के बाद बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। पता चला है कि इस यूनिवर्सिटी की फर्जी डिग्री और डिप्लोमा के सहारे न सिर्फ यूपी-बिहार, बल्कि उत्तराखंड में भी कई लोग सरकारी टीचर की नौकरी कर रहे हैं। मामला सामने आने के बाद उत्तराखंड के शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है और जांच के आदेश दे दिए गए हैं।
उत्तराखंड में ऐसे खुला मामला
यह पूरा खेल तब सामने आया, जब मीडिया में यह खबर प्रमुखता से छपी कि उत्तराखंड में 2917 बेसिक शिक्षकों की भर्ती में गड़बड़ी हो रही है। जब शिक्षा विभाग ने इसकी पड़ताल की, तो पता चला कि उत्तर प्रदेश से डीएलएड (D.El.Ed.) की डिग्री लेकर कई लोग उत्तराखंड में प्राइमरी स्कूल के सहायक अध्यापक बन गए हैं। इनमें से कुछ टीचरों ने हापुड़ की इसी बदनाम मोनाड यूनिवर्सिटी से बीएलएड (B.El.Ed.) की डिग्री ली थी।
अब शिक्षा विभाग ने इन सभी शिक्षकों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। विभाग ने आदेश जारी किया है कि यूपी से डीएलएड करके भर्ती हुए सभी शिक्षकों के दस्तावेजों की फिर से जांच की जाएगी। इन सभी को 19 दिसंबर 2025 को उप शिक्षा अधिकारी के सामने अपने स्थायी निवास प्रमाण पत्र और अन्य दस्तावेजों के साथ हाजिर होना होगा, ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।
कई राज्यों तक फैले हैं घोटाले के तार
यह घोटाला सिर्फ उत्तराखंड तक ही सीमित नहीं है। यूपी एसटीएफ की जांच में पहले ही यह बात सामने आ चुकी है कि मोनाड यूनिवर्सिटी की फर्जी डिग्रियों का इस्तेमाल करके महाराष्ट्र, बिहार और हरियाणा जैसे राज्यों में भी कई लोग सरकारी नौकरियां पा चुके हैं। यह घोटाला देश के कई राज्यों में फैले एक बड़े नेटवर्क की ओर इशारा कर रहा है, जहां चंद रुपयों के लिए डिग्रियां बेची गईं और हमारे बच्चों का भविष्य ऐसे फर्जी शिक्षकों के हाथों में सौंप दिया गया। अब देखना यह है कि जांच के बाद कितने "मुन्ना भाई" शिक्षक सलाखों के पीछे पहुंचते हैं।




