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Up Kiran, Digital Desk: दिल्ली के शाहदरा में एमएस पार्क कम्युनिटी सेंटर में शनिवार रात बारात का माहौल था। नाच-गाना चल रहा था। लोग नोट उड़ा रहे थे। इसी बीच झुग्गी में रहने वाला 14 साल का साहिल अपने छोटे भाई और दोस्तों के साथ वहां पहुंच गया। बच्चे जैसे हर शादी में करते हैं वैसे ही नोट बटोरने लगा। लेकिन किसी को यह मंजूर नहीं हुआ। बारात में मौजूद CISF के हेड कांस्टेबल मदन गोपाल तिवारी इतने नाराज हुए कि पहले बच्चे को बुरी तरह मारा फिर अपनी पिस्तौल निकालकर सिर में गोली मार दी। साहिल मौके पर ही ढेर हो गया।

गरीबी का शोर और बंदूक की गर्जना

साहिल का परिवार पास की झुग्गी बस्ती में रहता है। उसके पिता सिराजुद्दीन दिहाड़ी मजदूरी करते हैं। रात करीब दस बजे जब घुड़चढ़ी चल रही थी तो बच्चे खुशी-खुशी नोट उठा रहे थे। इसी दौरान मदन गोपाल ने साहिल को पकड़ा। पहले थप्पड़ और मुक्के बरसाए फिर जेब से सर्विस पिस्तौल निकालकर गोली चला दी। गोली सिर में लगी और मासूम की सांसें हमेशा के लिए थम गईं।

मौके पर पहुंची पुलिस ने तुरंत पकड़ा आरोपी को

गोली चलते ही पूरा पंडाल स्तब्ध रह गया। चीखें गूंजीं। पुलिस को सूचना मिलते ही टीम मौके पर पहुंची। मदन गोपाल तिवारी को मौके से ही धर दबोचा गया। उसकी पिस्तौल बरामद कर ली गई। पता चला कि उसकी ड्यूटी उत्तर प्रदेश में है और वह शादी में मेहमान के तौर पर आया था। पुलिस ने हत्या का केस दर्ज कर लिया है और हर एंगल से जांच शुरू कर दी है।

झुग्गी वालों में गुस्सा और डर का माहौल

इस घटना के बाद इलाके की झुग्गी बस्ती में मातम पसरा है। लोग डरे हुए हैं। बच्चे अब शादियों के नाम से सहम जाते हैं। साहिल के परिजन सदमे में हैं। उनका रो-रोकर बुरा हाल है। मोहल्ले वाले पूछ रहे हैं कि नोट उठाने की सजा गोली होती है क्या। वर्दी का रौब दिखाने की यह क्या परिभाषा है।