
char dham yatra 2025 का आरंभ में अब एक महीने से भी कम वक्त बचा है, मगर उससे पहले ही उत्तराखंड में एक नई मुसीबत ने पैर पसार लिए हैं। रुद्रप्रयाग जिले में इक्वाइन इन्फ्लूएंजा घोड़ों और खच्चरों को प्रभावित करने वाली एक भयावह और संक्रामक बीमारी के केस सामने आए हैं। ये बीमारी इतनी तेजी से फैल सकती है कि सरकार और श्रद्धालुओं की सांसें अटक गई हैं। चारधाम यात्रा का बड़ा हिस्सा इन जानवरों पर टिका है और अब इस खतरे ने पूरे तीर्थाटन के सुचारू संचालन पर सवालिया निशान लगा दिया है।
प्रदेश सरकार ने फौरन हाई अलर्ट जारी कर दिया है। रुद्रप्रयाग के वीरों और बस्ती गांवों में 18 घोड़े और खच्चर इस बीमारी की चपेट में पाए गए हैं। खबर मिलते ही पशुपालन मंत्री सौरभ बहुगुणा ने दो अप्रैल को देहरादून सचिवालय में आपात मीटिंग बुलाई। मीटिंग में साफ आदेश दिया गया कि यात्रा में इस्तेमाल होने वाले हर घोड़े और खच्चर की स्क्रीनिंग होगी और बाहर से आने वाले जानवरों के लिए हेल्थ सर्टिफिकेट और इक्वाइन इन्फ्लूएंजा निगेटिव रिपोर्ट अनिवार्य होगी।
80-90% बीमारी बढ़ने का खतरा
विशेषज्ञों का कहना है कि इक्वाइन इन्फ्लूएंजा का संक्रमण दर 80-90% तक है यानी ये जंगल की आग की तरह फैल सकता है। हाल ही में रुद्रप्रयाग, चमोली, टिहरी, उत्तरकाशी और बागेश्वर जिलों से 422 सैंपल लिए गए, जिनमें से 18 मामले सिर्फ रुद्रप्रयाग में पॉजिटिव पाए गए। ये बीमारी सांस के जरिए फैलती है और घोड़ों-खच्चरों में बुखार, खांसी और कमजोरी जैसे लक्षण पैदा करती है। यदि इसे काबू न किया गया तो यात्रा के दौरान ट्रांसपोर्टेशन का पूरा ढांचा चरमरा सकता है।
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