Up Kiran, Digital Desk: ग्लियोब्लास्टोमा (Glioblastoma) एक बेहद खतरनाक और तेजी से फैलने वाला ब्रेन ट्यूमर है, जो सामान्य कैंसर से कई मायनों में अलग है। यह ब्रेन में किसी भी हिस्से से जुड़ा हो सकता है, और अक्सर बिना किसी चेतावनी के सामने आ जाता है। इसकी अनियंत्रित वृद्धि और फैलने की गति इसे एक गंभीर स्वास्थ्य संकट बना देती है, जो मरीजों और उनके परिवारों के लिए मानसिक और भावनात्मक रूप से अत्यधिक चुनौतीपूर्ण होती है। हालांकि चिकित्सा क्षेत्र में लगातार शोध हो रहे हैं, लेकिन यह ट्यूमर अभी भी दिमाग में होने वाले सबसे आक्रामक कैंसरों में से एक माना जाता है।
ग्लियोब्लास्टोमा की विशेषता: क्यों है यह इतना खतरनाक?
ग्लियोब्लास्टोमा की सबसे बड़ी चुनौती इसका दिमाग में फैलने का तरीका है। अधिकांश कैंसर जब शरीर में फैलते हैं तो एक जगह पर गांठ बना लेते हैं, जिसे सर्जरी से निकाला जा सकता है। लेकिन ग्लियोब्लास्टोमा के कैंसर कोशिकाएं ब्रेन के स्वस्थ टिश्यूज में जड़ें बना लेती हैं, जो स्कैन में भी नहीं दिखाई देतीं। इसका मतलब है कि सर्जरी के बाद भी कैंसर की कुछ कोशिकाएं जीवित रहती हैं और बाद में फिर से उभर सकती हैं। इस कारण से इलाज का तरीका बहुत जटिल हो जाता है।
यह एक मेडिकल आपात स्थिति है
ग्लियोब्लास्टोमा का इलाज एक मेडिकल आपात स्थिति के रूप में किया जाता है। इसके तेजी से बढ़ने के कारण दिमाग पर दबाव बढ़ता है और इलाज के बावजूद इसकी पुनरावृत्ति की संभावना अधिक रहती है। शोधों से पता चलता है कि ग्लियोब्लास्टोमा की कुछ कोशिकाएं केवल 48 घंटों में दोगुनी हो सकती हैं, जिससे लक्षण बहुत तेजी से बिगड़ने लगते हैं।
ग्लियोब्लास्टोमा के लक्षण: क्या पहचानें?
ग्लियोब्लास्टोमा के शुरुआती लक्षण अक्सर अन्य साधारण समस्याओं जैसे माइग्रेन, तनाव या उम्र का असर समझकर नजरअंदाज कर दिए जाते हैं। इसके कुछ सामान्य लक्षणों में शामिल हैं:
लगातार सिरदर्द या तेज सिरदर्द
वयस्कों में अचानक दौरे (सीजर)
शरीर के किसी हिस्से में कमजोरी या सुन्न होना
बोलने में या समझने में कठिनाई
याददाश्त में कमी या स्वभाव में बदलाव
संतुलन बिगड़ना या धुंधला दिखना
अगर इनमें से एक या एक से अधिक लक्षण दिखें, और ये कुछ दिनों में बढ़ने लगें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है।
क्या हैं जोखिम कारक?
ग्लियोब्लास्टोमा का खतरा बढ़ती उम्र के साथ अधिक होता है। हालांकि यह कैंसर जीवनशैली, खानपान या धूम्रपान से सीधे संबंधित नहीं है, फिर भी कुछ खास कारकों की वजह से इसके होने का खतरा बढ़ सकता है। जैसे, जो लोग पहले सिर पर ज्यादा रेडिएशन ले चुके हैं या जिनके पास कुछ दुर्लभ जेनेटिक बीमारियाँ हैं, उन्हें अधिक जोखिम होता है। इस प्रकार, ग्लियोब्लास्टोमा से बचाव का कोई निश्चित तरीका नहीं है, और कई मामलों में इसके होने का कोई स्पष्ट कारण नहीं पाया जाता।
इलाज के तरीके: क्या है इसका इलाज?
ग्लियोब्लास्टोमा का इलाज सर्जरी, रेडिएशन और कीमोथेरेपी के मिश्रण से किया जाता है। ये उपाय ट्यूमर की वृद्धि को रोकने और लक्षणों को कम करने में मदद करते हैं, लेकिन पूरी तरह से इलाज होना दुर्लभ है। इसके इलाज में एक बड़ी समस्या यह है कि दवाइयाँ ब्रेन तक पहुँचने के लिए ब्लड-ब्रेन बैरियर से होकर गुजरनी पड़ती हैं, जो कई बार दवाइयों को नाकाम कर देता है। विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर पहचान, जागरूकता और लगातार अनुसंधान ही इस बीमारी से लड़ने के लिए सबसे प्रभावी तरीके हैं। इसलिए जल्दी से जल्दी जांच करवाना और सही इलाज शुरू करना जीवन की गुणवत्ता और जीवनकाल को बेहतर बना सकता है।
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