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नई दिल्ली,जैसलमेर: देश की मौजूदा सुरक्षा चुनौतियों और भविष्य के खतरों से निपटने की तैयारियों को लेकर सेना के शीर्ष नेतृत्व ने आर्मी कमांडर्स कॉन्फ्रेंस (Army Commanders' Conference) में एक गहन 'महा-समीक्षा' की। इस उच्च-स्तरीय बैठक में रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान और सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने सेना के सभी शीर्ष कमांडरों के साथ देश की सुरक्षा और सैन्य तैयारियों का जायजा लिया।

जैसलमेर में आयोजित इस कॉन्फ्रेंस में रक्षामंत्री ने सेना के वरिष्ठ अधिकारियों को संबोधित करते हुए स्पष्ट संदेश दिया कि हमें दुश्मन को कभी भी कम नहीं आंकना चाहिए और हमेशा हर चुनौती के लिए तैयार रहना चाहिए।

'ग्रे जोन' युद्ध और 'जॉइंटनेस' पर रहा फोकस

इस बार की कॉन्फ्रेंस में चर्चा के मुख्य बिंदु थे 'ग्रे जोन वॉरफेयर' और 'जॉइंटनेस'। 'ग्रे जोन वॉरफेयर' का मतलब दुश्मनों द्वारा अपनाए जाने वाले उन छद्म तरीकों से है, जहां सीधे तौर पर युद्ध नहीं होता, लेकिन सूचना, साइबर और मनोवैज्ञानिक तरीकों से देश को अस्थिर करने की कोशिश की जाती है। कमांडरों ने इससे निपटने के लिए एक विस्तृत रणनीति पर विचार-विमर्श किया।

इसके अलावा, CDS जनरल अनिल चौहान ने सेना, वायुसेना और नौसेना के बीच 'जॉइंटनेस' यानी तालमेल को और मजबूत करने पर जोर दिया ताकि भविष्य में तीनों सेनाएं मिलकर किसी भी ऑपरेशन को अंजाम दे सकें।

'आत्मनिर्भरता' और 'आधुनिकता' पर जोर

रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान के तहत रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने सेना को भविष्य की लड़ाइयों के लिए तैयार रहने के लिए सूचना युद्ध (Information Warfare), फोर्स मॉडर्-नाइजेशन (Force Modernisation) और अत्याधुनिक तकनीक पर ध्यान केंद्रित करने का आग्रह किया। कॉन्फ्रेंस के दौरान नई तकनीक का प्रदर्शन भी किया गया और सैनिकों की सुविधा के लिए 'सैनिक यात्री मित्र' ऐप जैसी कई पहलें भी शुरू की गईं।

यह कॉन्फ्रेंस ऐसे समय में हुई ਹੈ जब भारत चीन और पाकिस्तान की सीमाओं पर दोहरी चुनौतियों का सामना कर रहा ਹੈ। सेना के शीर्ष नेतृत्व का यह मंथन दिखाता ਹੈ कि भारतीय सेना भविष्य के किसी भी खतरे से निपटने के लिए कितनी गंभीर और तैयार है।