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बीजेपी के एक विधायक को हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। उन पर आरोप था कि उन्होंने दो शादियां की हैं, जो कानून के खिलाफ है, और इसी आधार पर उनकी विधायकी रद्द करने की मांग की गई थी। लेकिन कोर्ट ने इस याचिका को खारिज कर दिया है और विधायक की सदस्यता बरकरार रखी है।

मामला मध्य प्रदेश के एक बीजेपी विधायक से जुड़ा है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि विधायक ने अपनी पहली पत्नी को तलाक दिए बिना दूसरी शादी की है, जो हिंदू विवाह अधिनियम के तहत गैरकानूनी माना जाता है। इस आधार पर मांग की गई थी कि उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया जाए।

मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि यह मामला पूरी तरह से निजी है और इसका सीधा संबंध विधानसभा सदस्यता से नहीं है। कोर्ट ने यह भी कहा कि जब तक किसी अदालत द्वारा दंड घोषित नहीं होता, तब तक केवल आरोप के आधार पर किसी निर्वाचित जनप्रतिनिधि को अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता।

कोर्ट ने यह साफ किया कि यह मामला वैवाहिक विवाद का है और इसके लिए पीड़ित पक्ष के पास अलग से कानूनी उपाय उपलब्ध हैं। ऐसे मामलों में विधानसभा की सदस्यता को प्रभावित नहीं किया जा सकता।

विधायक ने अपने ऊपर लगे आरोपों को गलत बताया और कहा कि यह राजनीति से प्रेरित साजिश है। उन्होंने कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि न्याय व्यवस्था पर उन्हें पूरा भरोसा था और आज उन्हें न्याय मिल गया।

इस फैसले के बाद बीजेपी खेमे में राहत की लहर है, वहीं याचिका दाखिल करने वालों को झटका लगा है।