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Up Kiran, Digital Desk: हिंदू धर्म में खरमास की अवधि को किसी भी तरह के मांगलिक कार्यों के लिए शुभ नहीं माना जाता है। साल में दो बार ऐसा समय आता है जब लगभग एक महीने के लिए विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, मुंडन और नया व्यापार शुरू करने जैसे सभी शुभ कार्यों पर रोक लग जाती है। 2025 के अंत में खरमास फिर से लगने वाला है। आइए जानते हैं कि यह कब से शुरू हो रहा है, इसका महत्व क्या है और इस दौरान किन नियमों का पालन करना चाहिए।

कब से लग रहा है खरमास 2025-26?

ज्योतिषीय गणना के अनुसार, साल का दूसरा खरमास 15 दिसंबर 2025, सोमवार से शुरू होगा।इस दिन सूर्य देव देवगुरु बृहस्पति की राशि धनु में प्रवेश करेंगे। यह खरमास एक महीने तक रहेगा और इसका समापन 14 जनवरी 2026, मंगलवार को मकर संक्रांति के दिन होगा, जब सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इसके बाद ही दोबारा मांगलिक कार्य शुरू हो सकेंगे।

खरमास में क्यों नहीं होते शुभ कार्य?

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब ग्रहों के राजा सूर्य, देवगुरु बृहस्पति की राशि (धनु या मीन) में प्रवेश करते हैं, तो बृहस्पति का प्रभाव कम हो जाता है। गुरु को शुभता और मांगलिक कार्यों का कारक ग्रह माना जाता है। ऐसे में गुरु के कमजोर पड़ने से शुभ कार्यों का फल अच्छा नहीं मिलता।

इसके पीछे एक पौराणिक कथा भी है। कहा जाता है कि सूर्य देव अपने सात घोड़ों के रथ पर सवार होकर ब्रह्मांड का चक्कर लगाते हैं। एक बार लगातार यात्रा करने से उनके घोड़े थक गए और प्यास से व्याकुल हो गए। घोड़ों को आराम देने के लिए सूर्य देव एक तालाब के किनारे रुक गए, लेकिन उन्हें अपनी यात्रा भी जारी रखनी थी। तब उन्होंने अपने रथ में घोड़ों की जगह दो 'खर' यानी गधों को जोत लिया। गधों की गति घोड़ों से धीमी होने के कारण इस एक महीने में सूर्य का तेज कम हो गया और उनकी चाल धीमी पड़ गई। इसी कारण इस एक महीने की अवधि को खरमास कहा जाता है और इसमें कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता।

खरमास में क्या करें और क्या न करें?

खरमास की अवधि भले ही मांगलिक कार्यों के लिए अशुभ हो, लेकिन धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से इसे बहुत पवित्र माना गया है।

क्या करें:

  • पूजा-पाठऔर स्नान-दान: इस महीने में पवित्र नदियों में स्नान करना, दान-पुण्य करना और दीपदान करना बहुत शुभ माना जाता है।
  • सूर्यदेव की उपासना: खरमास में सूर्य देव की पूजा का विशेष महत्व है। प्रतिदिनसुबह तांबे के लोटे से सूर्य को अर्घ्य दें।ऐसा करने से अशुभ प्रभाव कम होते हैं।
  • धार्मिकअनुष्ठान: इस दौरान पूजा-पाठ, भजन-कीर्तन, और व्रत किए जा सकते हैं। नामकरण और अन्नप्राशनजैसे संस्कार भी किए जा सकते हैं।
  • खरीदारी: विवाह से जुड़ी चीजें जैसे कपड़े, गहने या वाहन खरीदने की मनाही नहीं है।

क्या न करें:

  • मांगलिककार्य: इस दौरान विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, मुंडन, जनेऊ संस्कार जैसे कार्य बिल्कुल न करें।
  • नयाकाम या निवेश: कोई नया व्यापार शुरू करने या बड़ा निवेश करने से बचें।
  • नकारात्मकव्यवहार: इस दौरान किसी से बहस करने, झूठ बोलने या किसी को नुकसान पहुंचानेसे बचना चाहिए।
  • तामसिकभोजन: खरमास में लहसुन-प्याज और मांसाहारीभोजन से दूर रहना चाहिए।