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Up Kiran,Digital Desk : सर्दियों में जब तापमान गिरता है, तो अधिकतर लोग गर्म रहने के लिए कपड़ों की कई परतें पहनते हैं। लेकिन कई लोग ऐसे भी हैं, जिन्हें खासतौर पर हाथों और पैरों में अत्यधिक ठंड महसूस होती है। कई लोग तो इस समस्या से बचने के लिए सोते वक्त मोजे पहनते हैं, फिर भी उनके पैरों में बर्फ जैसी ठंड रहती है। क्या आपने कभी सोचा है कि ऐसा क्यों होता है? आइए जानते हैं इसके पीछे की वैज्ञानिक वजह।

 

पैरों की ठंडक के मुख्य कारण

खराब रक्त संचार

 

ठंडे पैरों का सबसे सामान्य कारण रक्त संचार में कमी है। जब पैरों तक रक्त ठीक से नहीं पहुंचता, तो वे ठंडे रह जाते हैं। सर्दियों में शरीर का तंत्र स्वाभाविक रूप से हाथों और पैरों के रक्त वाहिकाओं को संकुचित कर देता है ताकि आंतरिक अंगों का तापमान स्थिर बना रहे। परिणामस्वरूप, बाहरी अंगों, जैसे पैरों में ठंडक बनी रहती है। इसके अलावा, डायबिटीज और आर्टरी समस्याओं वाले लोगों के पैरों में ठंडक का अहसास ज्यादा होता है।

 

कोलेस्ट्रॉल का असर

 

अगर किसी व्यक्ति का कोलेस्ट्रॉल लेवल अधिक है, तो रक्त संचार कमजोर हो जाता है। इससे रक्त कोशिकाएँ सिकुड़ने लगती हैं और पैरों में ठंड का अहसास होता है। यह समस्या अधिकतर उच्च कोलेस्ट्रॉल वाले लोगों में देखने को मिलती है।

 

तंत्रिका क्षति (न्यूरोपैथी)

 

कुछ मामलों में, पैरों में ठंड का अहसास तापमान की वजह से नहीं बल्कि तंत्रिकाओं के क्षतिग्रस्त होने के कारण होता है। इसे न्यूरोपैथी कहा जाता है। खासकर डायबिटीज रोगियों को इस समस्या का सामना अधिक होता है, जिससे उन्हें पैरों में ठंड महसूस होती है, भले ही तापमान सामान्य हो।

 

शरीर का तापमान नियंत्रण

 

सर्दियों में शरीर अपने तापमान को नियंत्रित करने के लिए विशेष रूप से आंतरिक अंगों को गर्म रखने की कोशिश करता है, जबकि बाहरी अंगों में रक्त संचार कम कर देता है। इस प्रक्रिया के कारण, भले ही आप मोजे पहनकर सोते हों, आपके पैर ठंडे ही रहते हैं।

 

थायरॉइड की समस्या

 

अगर शरीर में थायरॉइड हार्मोन की कमी होती है, तो मेटाबोलिज़्म धीमा हो जाता है। इसके कारण शरीर में गर्मी बनाने की क्षमता घट जाती है और पैरों में ठंडक महसूस होती है। इस कारण से थायरॉइड के मरीजों को अक्सर ठंड लगती है।

 

तनाव और चिंता

 

अत्यधिक तनाव लेने से शरीर में एड्रेनालाईन का स्तर बढ़ता है, जिससे रक्त वाहिकाएँ संकुचित हो जाती हैं और पैरों में ठंडक का अहसास होता है। यह समस्या तनाव या चिंता से जूझ रहे लोगों में आम होती है।

 

अस्वस्थ जीवनशैली

 

हमारी जीवनशैली का भी पैरों की ठंडक पर गहरा असर पड़ता है। धूम्रपान, शारीरिक निष्क्रियता, डिहाइड्रेशन और गलत आहार से रक्त संचार प्रभावित हो सकता है। इसके अलावा, आयरन और विटामिन बी12 की कमी के कारण भी पैरों में ठंड लग सकती है।

 

क्या मोजे पहनकर सोना सही है?

 

रात में मोजे पहनकर सोना फायदेमंद हो सकता है। यह शरीर के तापमान को बनाए रखने में मदद करता है और आपको बेहतर नींद लेने में मदद करता है। नेशनल स्लीप फाउंडेशन के अनुसार, मोजे पहनने से पैरों का तापमान बढ़ता है और रक्त वाहिकाएँ फैलती हैं, जिसे वेसोडिलेशन कहा जाता है। इस प्रक्रिया से रक्त संचार बेहतर होता है और नींद जल्दी आ जाती है। इसके अलावा, मोजे पहनने से रेनॉल्ड्स डिजीज का खतरा कम हो सकता है, और पैरों की त्वचा भी स्वस्थ रहती है।

 

किन लोगों को ज्यादा ठंड लगती है?

 

कुछ विशेष समूह के लोग सर्दियों में अधिक ठंड महसूस करते हैं:

वृद्ध लोग

एनीमिया के रोगी

थायरॉइड के मरीज

रेनॉल्ड्स डिजीज के रोगी

कमजोर रक्त संचार वाले लोग

तनाव या चिंता से प्रभावित लोग

 

किन्हें मोजे नहीं पहनने चाहिए?

 

हालांकि मोजे पहनने से कई लाभ हो सकते हैं, कुछ लोगों को मोजे पहनने से बचना चाहिए:

जिनकी त्वचा अत्यधिक संवेदनशील हो

डायबिटीज के मरीज

जिनको अत्यधिक पसीना आता हो

जिनको फंगल इंफेक्शन की समस्या हो

जिनकी त्वचा से संबंधित समस्याएँ हो