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Up Kiran, Digital Desk: ठंड का मौसम जहां कुछ के लिए आरामदायक होता है, वहीं यह हमारे शरीर के कुछ हिस्सों के लिए खतरनाक भी साबित हो सकता है। खासकर पैरों की सेहत पर इसका गहरा असर पड़ सकता है। खासतौर पर वो लोग जो डायबिटीज, धूम्रपान या तंबाकू का सेवन करते हैं, उनके लिए सर्दियों में अतिरिक्त सतर्कता की आवश्यकता है। जिला अस्पताल के डॉक्टर दिनेश परमार के मुताबिक, इस मौसम में पैरों की रक्त संचार में रुकावट पैदा हो सकती है, जिससे गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।

सर्दियों में पैरों की रक्त संचार पर असर

सर्दी के सीजन में तापमान गिरने से रक्त नलिकाएं सिकुड़ जाती हैं। इस कारण रक्त का प्रवाह सही तरीके से नहीं हो पाता, और पैरों तक ऑक्सीजन और रक्त पहुंचने में रुकावट आती है। अगर किसी के पैरों की अंगुलियों में झनझनाहट, काले धब्बे या लाल निशान दिखाई दें तो इसे हलके में न लें। डॉक्टरों के मुताबिक, यह संकेत होते हैं कि पैरों में रक्त का प्रवाह सही नहीं हो पा रहा, और यदि इसे नजरअंदाज किया गया तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।

मधुमेह और पैरों की सेहत

सर्दियों में मधुमेह के मरीजों को खासतौर पर सतर्क रहने की आवश्यकता है। डॉक्टर परमार बताते हैं कि डायबिटीज के रोगियों की रक्त वाहिकाओं में चर्बी जमा हो जाती है, जिससे रक्त का प्रवाह प्रभावित होता है। जब तापमान नीचे गिरता है तो रक्त वाहिकाएं और सिकुड़ जाती हैं, जिससे पैरों तक रक्त की आपूर्ति कम हो जाती है और अंगुलियां काली पड़ने लगती हैं। इसे गैंग्रीन के शुरुआती संकेत माना जाता है। ऐसे में पैरों को साफ और सूखा रखना, उन्हें गर्म रखना और नियमित रूप से जांच करना आवश्यक है।

धूम्रपान से संबंधित खतरे

जो लोग धूम्रपान या तंबाकू का सेवन करते हैं, उनके लिए सर्दियों का मौसम बहुत खतरनाक हो सकता है। सर्दी में तंबाकू के हानिकारक तत्व शरीर में रक्त के प्रवाह को और अधिक प्रभावित करते हैं। इससे पैरों की रक्त नलिकाएं सिकुड़ने लगती हैं, जिससे पैरों की अंगुलियों में दर्द, झनझनाहट और लाल धब्बे दिखाई देने लगते हैं। समय रहते इन लक्षणों का इलाज न किया जाए तो यह गैंग्रीन (मांस का सड़ना) में बदल सकता है। इसे बर्गर डिजीज भी कहा जाता है, जो खासतौर पर धूम्रपान करने वालों को प्रभावित करता है।

अन्य रोगों के लिए सर्दियों के खतरे

कुछ अन्य बीमारियों से ग्रस्त लोगों के लिए भी सर्दियों का मौसम काफी मुश्किल हो सकता है। वैस्कुलाइटिस (Vasculitis) जैसी स्थितियों में रक्त वाहिकाओं में सूजन आ जाती है, जिससे खून का थक्का जम सकता है। तापमान में गिरावट से रक्त का प्रवाह और भी अधिक प्रभावित हो सकता है। ऐसे में मरीजों को अपने पैरों को खास देखभाल और गर्माहट देने की जरूरत होती है। यदि इस समस्या का समय पर इलाज न किया जाए तो पैरों के ऊतकों को स्थायी नुकसान हो सकता है।

रेनाड्स रोग से बचाव

रेनाड्स रोग से पीड़ित व्यक्तियों को भी सर्दियों में परेशानी का सामना करना पड़ता है। इस बीमारी में रक्त नलिकाएं अत्यधिक ठंड के प्रति संवेदनशील हो जाती हैं। जैसे ही पैर ठंडे तापमान से संपर्क करते हैं, रक्त का प्रवाह अस्थायी रूप से रुक जाता है, और अंगुलियां सफेद, नीली या लाल दिखने लगती हैं। बार-बार ऐसा होने से यह गहरे घावों का कारण बन सकता है। इस स्थिति से बचने के लिए नियमित दवाइयों के साथ सतर्क खानपान और डॉक्टर से निरंतर परामर्श जरूरी है।