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Up kiran,Digital Desk : छत्तीसगढ़ में नक्सलियों की कमर टूटती जा रही है और वे लगातार हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौट रहे हैं। पिछले दो दिनों में राज्य के दो अलग-अलग जिलों में सुरक्षाबलों को बड़ी कामयाबी मिली है, जहाँ 19 महिलाओं समेत कुल 43 नक्सलियों ने हथियार डाल दिए। सरेंडर करने वालों में कई ऐसे खूंखार कमांडर भी शामिल हैं, जिन पर कुल मिलाकर 1 करोड़ 37 लाख रुपये का इनाम था।

नारायणपुर: 89 लाख के इनामी 28 नक्सलियों ने किया सरेंडर

नारायणपुर जिले में एक साथ 28 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया, जिनमें 19 महिलाएं थीं। इनमें से 22 ऐसे थे, जिन पर 89 लाख रुपये का इनाम घोषित था। इन सभी ने सरकार की विकास और पुनर्वास योजनाओं पर भरोसा जताते हुए यह कदम उठाया।

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, ये लोग राज्य सरकार की 'नियद नेल्लानार' (आपका अच्छा गाँव) योजना और 'पूना मरघम' (नई सुबह, नई शुरुआत) अभियान से काफी प्रभावित थे। इन योजनाओं के तहत सरकार दूर-दराज के गांवों तक विकास पहुंचा रही है और सरेंडर करने वालों को समाज में वापस एक अच्छी जिंदगी जीने में मदद कर रही है।

सरेंडर करने वालों में 8-8 लाख के इनामी डिविजनल कमेटी सदस्य पंडी ध्रुव (दिनेश) और मिलिट्री कंपनी नंबर 6 के तीन सदस्य दुले मंडावी (मुन्नी), छत्तिस पोयम और पदनी ओयम जैसे बड़े नाम शामिल थे। इसके अलावा, कई एरिया कमेटी के सदस्य भी थे, जिन पर 5-5 लाख का इनाम था। इन लोगों ने एक SLR और एक INSAS राइफल जैसे खतरनाक हथियार भी पुलिस को सौंपे।

सुकमा: दो नक्सली पति-पत्नी जोड़ों समेत 15 ने छोड़ी हिंसा

इससे ठीक एक दिन पहले सोमवार को सुकमा जिले में भी 15 नक्सलियों ने सुरक्षाबलों के सामने हथियार डाल दिए थे। इनमें 5 महिलाएं भी शामिल थीं। यहाँ सरेंडर करने वालों में 9 ऐसे थे, जिन पर कुल 48 लाख का इनाम था।

दिलचस्प बात यह है कि इनमें दो खूंखार नक्सली पति-पत्नी के जोड़े भी शामिल थे। मांडवी सन्ना और उसकी पत्नी सोड़ी हिड़मे, और सूर्यम व उसकी पत्नी मीणा, इन चारों पर 8-8 लाख रुपये का इनाम था। सरकार की नीति के तहत, इन सभी को अपनी नई जिंदगी शुरू करने के लिए तत्काल 50,000 रुपये की सहायता राशि भी दी गई।

यह लगातार हो रहे सरेंडर इस बात का सबूत हैं कि सरकार की विकास और विश्वास की नीति काम कर रही है और बस्तर में शांति का एक नया दौर शुरू हो रहा है।