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Up Kiran, Digital Desk: जैसे-जैसे दुर्गा पूजा करीब आ रही है, पश्चिम बंगाल का माहौल धार्मिक से ज्यादा राजनीतिक होता जा रहा है। इस बार पूजा सिर्फ पंडालों और मां दुर्गा की आराधना तक सीमित नहीं रह गई है — यह अब चुनावी रणभूमि बन चुकी है।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने दुर्गा पूजा को एक रणनीतिक अवसर में बदल दिया है। उसका मकसद तृणमूल कांग्रेस (TMC) को उसके ही सांस्कृतिक मैदान में घेरना है, खासकर उन प्रवासी बंगालियों के जरिए जो देश के अलग-अलग हिस्सों में रहते हैं।

क्या है BJP की नई रणनीति?

BJP के शीर्ष नेताओं ने पूजा समितियों और बंगाली समुदायों से संपर्क साधने के लिए देशभर के बड़े शहरों का दौरा शुरू कर दिया है। इसमें दिल्ली, मुंबई, पुणे, सूरत, वाराणसी, चेन्नई, बेंगलुरु जैसे शहर शामिल हैं — जहाँ बंगाली आबादी बड़ी संख्या में रहती है।

BJP नेताओं का कहना है कि ये दौरे सिर्फ "त्योहारों के समय मिलने-जुलने" की औपचारिकता हैं। लेकिन पार्टी के अंदरूनी सूत्र साफ कहते हैं कि असली मकसद वोटिंग से पहले माहौल बनाना है — और वो भी राज्य के बाहर रह रहे बंगालियों के जरिए।

TMC की 'बंगाली अस्मिता' बनाम BJP की 'प्रवासी पहुंच'

TMC लगातार बंगाली पहचान, भाषा और संस्कृति की रक्षा की बात करती रही है। वहीं BJP अब उसी भावना को अपने पक्ष में मोड़ना चाहती है। BJP नेताओं का तर्क है कि TMC प्रवासियों के उत्पीड़न की झूठी कहानियाँ गढ़ रही है।

पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष राहुल सिन्हा ने दावा किया, “बंगालियों को कहीं कोई तकलीफ नहीं दी जा रही है। ये सब तृणमूल की गढ़ी हुई कहानियाँ हैं।”

पूजा समितियों के जरिए वोट बैंक तक पहुंच

BJP ने पूजा समितियों को एक 'जनसंपर्क मंच' में बदल दिया है। जहां नेताओं और स्थानीय बंगालियों के बीच खुलकर बातचीत हो रही है। कहीं पारंपरिक नाश्ता परोसा जा रहा है, तो कहीं सामूहिक भोजन के बहाने चर्चा की जा रही है।

इस पूरे अभियान की देखरेख दो राष्ट्रीय महासचिव, दुष्यंत गौतम और तरुण चुग कर रहे हैं। वे स्थानीय टीमें बनाकर बंगाल से गए नेताओं को हर राज्य की पूजा समितियों से मिलवा रहे हैं।

राज्य से बाहर के बंगाली बनेंगे ‘चेंज एजेंट’?

BJP की योजना ये है कि दूसरे राज्यों में रहने वाले बंगाली अपने रिश्तेदारों और परिचितों के जरिए बंगाल में सत्ता परिवर्तन का संदेश पहुँचाएँ।

चंडीगढ़ से लौटे भाजपा नेता सिन्हा ने कहा, “जिनसे हम मिलते हैं, वे भले ही वहां वोट न डालें, लेकिन उनके परिवार बंगाल में रहते हैं। वे वहाँ की स्थिति से उन्हें अवगत कराएँगे।”