Up kiran,Digital Desk : पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची को लेकर उठे विवाद पर चुनाव आयोग ने अपनी स्थिति साफ कर दी है। आयोग ने कहा है कि जिन तीन मतदाताओं को तृणमूल कांग्रेस ने मृत घोषित किए जाने का आरोप लगाया था, उनके नाम प्रशासनिक और तकनीकी गलतियों की वजह से सूची से हटे थे। यह कोई जानबूझकर की गई कार्रवाई नहीं थी और गलती सामने आते ही सुधार की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
दरअसल, तृणमूल कांग्रेस के नेता अभिषेक बनर्जी ने दक्षिण 24 परगना जिले के बारुईपुर में आयोजित एक जनसभा में तीन मतदाताओं को मंच पर बुलाकर दावा किया था कि मसौदा मतदाता सूची में उन्हें मृत दिखा दिया गया है। मामला सामने आने के बाद चुनाव आयोग ने तुरंत कार्रवाई करते हुए बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) और निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी से विस्तृत रिपोर्ट मांगी, जो तय समय के भीतर आयोग को सौंप दी गई।
चुनाव आयोग ने क्या कहा
राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मणिरुल मोल्ला, माया दास और हरेकृष्ण गिरी—इन तीनों मामलों में नाम हटने की वजह अनजानी त्रुटियां थीं। अधिकारी के अनुसार, मणिरुल मोल्ला और हरेकृष्ण गिरी के नाम बूथ स्तर पर बनाई गई डिलीशन सूची में नहीं थे, लेकिन वेबसाइट पर अपलोड हुई सूची में गलती से उनके नाम जुड़ गए। इसे तकनीकी और मानवीय चूक माना गया है।
घर जाकर किया गया सत्यापन
विवाद सामने आने के बाद संबंधित बीएलओ ने दोनों मतदाताओं के घर जाकर सत्यापन किया। मौके पर ही जरूरी फॉर्म भरवाए गए और नाम दोबारा मतदाता सूची में जोड़ने के लिए आवेदन जमा किए गए। अधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया कि इन दोनों के फॉर्म-6 आवेदन अभिषेक बनर्जी की जनसभा से पहले ही दाखिल हो चुके थे। माया दास के मामले में भी दस्तावेजों की जांच के बाद नियमों के तहत सुधार की कार्रवाई की गई।
टीएमसी के आरोप
अभिषेक बनर्जी ने 2 जनवरी को आरोप लगाया था कि दक्षिण 24 परगना जिले में ऐसे कम से कम 24 मामले हैं, जहां जीवित लोगों के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। उन्होंने दावा किया था कि इनमें दो मतदाता मेटियाब्रुज और एक काकद्वीप क्षेत्र से हैं। तृणमूल कांग्रेस का कहना है कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया में गंभीर खामियां हैं, जिन पर तुरंत ध्यान दिया जाना चाहिए।
सुधार या प्रक्रिया रोकने की मांग
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 3 जनवरी को मुख्य चुनाव आयुक्त को पत्र लिखकर एसआईआर प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों को तत्काल ठीक करने या राज्य में इस प्रक्रिया को रोकने की मांग की थी। चुनाव आयोग का कहना है कि सभी मामलों में दस्तावेजों की जांच कर नियमों के अनुसार कदम उठाए गए हैं। मार्च–अप्रैल में संभावित विधानसभा चुनावों को देखते हुए राज्य में मतदाता सूची की शुद्धता को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक सतर्कता और बढ़ गई है।
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