Up Kiran, Digital Desk: बच्चों का स्वास्थ्य माता-पिता के लिए सबसे ऊपर होता है। ऐसे में कई बीमारियाँ चिंता का कारण बन जाती हैं, और उनमें से एक है पीलिया, जिसे इंग्लिश में जॉन्डिस (Jaundice) कहते हैं। यह बीमारी खासकर बच्चों में काफी आम है और इसके प्रति जागरूकता बेहद ज़रूरी है। आज हम समझेंगे कि वायरल पीलिया क्या है, इसके क्या लक्षण होते हैं और अपने नन्हे-मुन्नों को इससे कैसे बचाया जा सकता है।
क्या है वायरल पीलिया? पीलिया एक ऐसी स्थिति है जब शरीर में बिलीरुबिन (bilirubin) नाम का पीला पिगमेंट बढ़ जाता है। यह आमतौर पर तब होता है जब लिवर ठीक से काम नहीं कर पाता या शरीर में लाल रक्त कोशिकाएं (red blood cells) ज्यादा टूट रही हों। वायरल पीलिया खासकर उन वायरसों के कारण होता है जो लिवर को नुकसान पहुंचाते हैं, जैसे हेपेटाइटिस ए (Hepatitis A) और हेपेटाइटिस बी (Hepatitis B)। ये वायरस दूषित पानी, भोजन या संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से फैल सकते हैं।
अपने बच्चे में इन लक्षणों को पहचानें: बच्चों में पीलिया के शुरुआती लक्षण अक्सर सामान्य फ्लू जैसे लग सकते हैं, इसलिए सावधानी ज़रूरी है:
आंखें और त्वचा का पीला पड़ना: यह सबसे स्पष्ट और मुख्य लक्षण है। बच्चे की आँखों का सफेद हिस्सा और त्वचा पीली दिखने लगेगी।
गहरे रंग का पेशाब (Urine): बच्चे का पेशाब सामान्य से ज़्यादा गहरा, चाय या कोका-कोला के रंग का हो सकता है।
हल्के रंग का मल (Stool): मल का रंग मिट्टी जैसा या बहुत हल्का हो सकता है।
थकान और कमज़ोरी: बच्चा सामान्य से ज़्यादा थका हुआ और सुस्त लगेगा।
भूख न लगना: बच्चे को खाने-पीने की इच्छा कम हो जाएगी।
जी मिचलाना और उल्टी: कुछ बच्चों को उल्टी या जी मिचलाने की शिकायत हो सकती है।
पेट में दर्द: पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में हल्का दर्द या असहजता महसूस हो सकती है।
बुखार: कभी-कभी हल्का बुखार भी हो सकता है।
अगर आपको अपने बच्चे में इनमें से कोई भी लक्षण दिखे, तो बिना देर किए तुरंत बाल रोग विशेषज्ञ (pediatrician) से सलाह लें।
वायरल पीलिया से बचाव उतना मुश्किल नहीं, जितना लगता है। कुछ सामान्य बातों का ध्यान रखकर आप अपने बच्चे को सुरक्षित रख सकते हैं:
साफ-सफाई का विशेष ध्यान: बच्चों को नियमित रूप से हाथ धोने की आदत सिखाएं, खासकर खाना खाने से पहले और शौच के बाद।
सुरक्षित भोजन और पानी: बाहर के खुले खाने, कटे हुए फल और दूषित पानी से बचें। घर में उबला हुआ या फिल्टर किया हुआ पानी ही पिलाएं। फलों और सब्जियों को अच्छी तरह धोकर ही इस्तेमाल करें।
हेपेटाइटिस ए और बी का टीका: अपने बच्चे को डॉक्टर की सलाह पर हेपेटाइटिस ए और बी का टीका ज़रूर लगवाएं। यह पीलिया से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।
व्यक्तिगत चीजों को साझा न करें: संक्रमित व्यक्ति के टूथब्रश, रेज़र या तौलिये जैसी निजी चीजों को साझा करने से बचें।
स्वस्थ आहार: बच्चे को पौष्टिक और संतुलित आहार दें, जिससे उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता (immunity) मज़बूत रहे।
पर्याप्त आराम और तरल पदार्थ: अगर बच्चा बीमार महसूस करे, तो उसे पर्याप्त आराम दें और खूब सारे तरल पदार्थ (जैसे पानी, नींबू पानी, सूप) पीने को दें।
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