Up Kiran, Digital Desk: किडनी से जुड़ी बीमारियाँ अब एक आम समस्या बन चुकी हैं, लेकिन हम इसके प्रति सचेत हो रहे हैं? आजकल की जीवनशैली, खराब आहार और पानी की कमी इस बढ़ती समस्या के प्रमुख कारण हैं। किडनी हमारे शरीर का एक महत्वपूर्ण अंग है, जो हमारे खून को साफ करता है और शरीर से विषैले तत्व बाहर निकालता है। यह शरीर के संतुलन को बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाती है। किडनी की कमजोर कार्यप्रणाली का असर पूरे शरीर पर पड़ सकता है।
किडनी का कार्य और उसकी अहमियत
किडनी शरीर के प्राकृतिक फिल्टर की तरह कार्य करती है। यह खून में मौजूद अपशिष्ट पदार्थों, टॉक्सिन्स और अतिरिक्त तरल को पेशाब के माध्यम से बाहर निकालने का काम करती है। इसके अलावा, किडनी रक्तचाप को नियंत्रित करने, हड्डियों को मजबूत बनाए रखने और शरीर के अन्य अंगों के सही तरीके से कार्य करने में मदद करती है। अगर किडनी ठीक से काम नहीं करती तो पेशाब से जुड़ी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं, जो स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाल सकती हैं।
स्वर विज्ञान का प्रभाव
स्वर विज्ञान एक प्राचीन भारतीय शास्त्र है, जिसमें यह बताया गया है कि हमारी नाक से निकलने वाली सांस का हमारे शरीर पर गहरा असर पड़ता है। इस शास्त्र के अनुसार, जब सांस बाईं नाक से निकलती है तो उसे 'स्वर' कहा जाता है, जो शरीर की ऊर्जा को संतुलित करने में मदद करता है। सही समय पर और सही नाड़ी के माध्यम से सांस लेने से शरीर का संतुलन बना रहता है।
चंद्र नाड़ी और सूर्य नाड़ी: शरीर पर असर
स्वर विज्ञान के अनुसार, हमारे शरीर में दो मुख्य नाड़ियाँ होती हैं। बाईं नाक से निकलने वाली सांस को चंद्र नाड़ी कहते हैं, जो शीतल और शांति से जुड़ी होती है। वहीं दाईं नाक से निकलने वाली सांस सूर्य नाड़ी से संबंधित होती है, जो गर्म और सक्रिय ऊर्जा का प्रतीक है। इन नाड़ियों का प्रभाव शरीर के विभिन्न अंगों पर पड़ता है और किडनी से भी इसका गहरा संबंध है।
किडनी और चंद्र नाड़ी का सम्बन्ध
स्वर विज्ञान के अनुसार, किडनी का संबंध पानी और खून से है, और चंद्र नाड़ी शीतल ऊर्जा से जुड़ी होती है। इस कारण चंद्र नाड़ी को किडनी के लिए फायदेमंद माना जाता है। माना जाता है कि जब चंद्र नाड़ी सक्रिय रहती है, तो किडनी को राहत मिलती है और उस पर दबाव कम होता है।
पेशाब करते समय ध्यान रखें
स्वर विज्ञान के अनुसार, जब आप पेशाब करें तो बाईं नाक से सांस लेने की कोशिश करें। इसे चंद्र नाड़ी के सक्रिय होने से जोड़ा जाता है। दाईं नाक से सांस लेने से बचने की सलाह दी जाती है, क्योंकि इससे पेशाब में जलन और अन्य समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।
चंद्र नाड़ी की पहचान कैसे करें?
चंद्र नाड़ी की पहचान करना सरल है। बस दाईं नाक को हल्का बंद करके देखिए कि बाईं नाक से सांस आराम से आ रही है या नहीं। अगर बाईं नाक से सांस आसानी से आ रही है तो इसका मतलब है कि चंद्र नाड़ी सक्रिय है। अगर ऐसा नहीं हो रहा है तो कुछ देर दाईं करवट लेटकर फिर से जांचें।
किडनी खराब होने के संकेत
किडनी के सही से काम न करने पर इसके पहले लक्षण पेशाब से जुड़ी समस्याओं के रूप में सामने आते हैं। इसमें पेशाब की मात्रा कम होना, पेशाब से बदबू आना, पेशाब करते समय जलन और दर्द होना, या बार-बार पेशाब आने की समस्या शामिल हैं। अगर इन लक्षणों को नजरअंदाज किया जाए तो यह गंभीर किडनी समस्याओं का कारण बन सकते हैं।




