Up Kiran, Digital Desk: बिहार विधानसभा चुनाव 6 और 11 नवंबर को दो चरणों में होने जा रहे हैं, और नतीजे 14 नवंबर को सामने आएंगे। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने 20 साल के शासन को ताकत बनाते हुए जोरदार प्रचार शुरू कर दिया है। इस बार उन्होंने बड़े वादों और कल्याणकारी योजनाओं के जरिए वोटरों का दिल जीतने की तैयारी की है।
मुजफ्फरपुर में एक रैली में नीतीश ने कहा, “2005 से पहले बिहार में अराजकता थी। लोग डरते थे, सड़कों की हालत खराब थी, बिजली नहीं मिलती थी। लेकिन हमने सबके लिए काम किया है। आज बिहार में शांति और विकास है।”
नीतीश कुमार ने यह भी दावा किया कि अब तक 50 लाख युवाओं को सरकारी नौकरी मिल चुकी है और आने वाले 5 सालों में 1 करोड़ लोगों को रोजगार देने का लक्ष्य है।
मुफ्त बिजली और स्मार्टफोन: वोटर्स के लिए बड़ा ऑफर
नीतीश सरकार ने उन वादों को भी अपनाया है, जिनकी पहले आलोचना करती थी। अब हर परिवार को हर महीने 125 यूनिट बिजली मुफ्त देने की घोषणा की गई है। इससे करोड़ों लोगों को सीधा फायदा होगा।
इसके अलावा, सरकारी योजनाओं की जानकारी फैलाने के लिए गांव-गांव में काम करने वाले 10,000 'विकास मित्रों' को टैबलेट खरीदने के लिए 25,000 रुपये मिलेंगे। उनके ट्रांसपोर्ट और स्टेशनरी भत्ते में भी बढ़ोतरी की गई है।
शिक्षा सेवकों और अल्पसंख्यक समुदायों के बच्चों की मदद करने वाले तालीमी मरकज़ को स्मार्टफोन खरीदने के लिए 10,000 रुपये दिए जाएंगे।
पेंशन, बेरोजगारी भत्ता और महिलाओं के लिए योजनाएं
नीतीश कुमार ने बुजुर्गों, विधवाओं और दिव्यांगों की पेंशन में भी 700 रुपये की बढ़ोतरी की है। जून से उन्हें हर महीने 1,100 रुपये मिल रहे हैं। इसके अलावा 1.11 करोड़ लोगों को ये रकम सीधा बैंक खातों में भेजी गई।
युवाओं को भी लुभाने के लिए सरकार ने स्नातक और इंटर पास बेरोजगारों को 1,000 रुपये महीना बेरोजगारी भत्ता देने का एलान किया है।
महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना शुरू की गई है, जिसमें उन्हें 10,000 रुपये की पहली किस्त और 2 लाख रुपये तक का फंड मिलेगा।
भाजपा बनाम जदयू: आंकड़े क्या कहते हैं?
2020 के चुनावों में भाजपा ने 74 सीटें जीती थीं, जबकि जदयू सिर्फ 43 सीटों पर ही सिमट गई थी। तब भाजपा का स्ट्राइक रेट 67% रहा था, जबकि जदयू सिर्फ 37% सीटें ही जीत पाई थी।
इस बार भी भाजपा का ग्राफ लगातार ऊपर जा रहा है। लेकिन नीतीश कुमार अभी भी बिहार के एक बड़े चेहरे हैं। वे अपने विकास के मॉडल और लंबे शासन के अनुभव को हथियार बना रहे हैं।
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