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Up Kiran, Digital Desk: राजधानी जयपुर में एक पिता ने अपनी बेटी की शादी को यादगार बनाने के लिए ऐसा कदम उठाया है, जो न केवल उसकी बेटी के लिए, बल्कि पूरे परिवार के लिए एक धरोहर बन जाएगा। उन्होंने पारंपरिक शादी कार्ड से हटकर एक अनोखा और भव्य कार्ड तैयार कराया है, जो न केवल दिल छूने वाला है बल्कि कला और संस्कृति का बेहतरीन उदाहरण भी प्रस्तुत करता है। यह कार्ड कागज से नहीं, बल्कि चांदी से बना है, और इसकी लागत करीब 25 लाख रुपये आई है।

चांदी से बना विवाह निमंत्रण

इस कार्ड की खासियत यह है कि इसे तैयार करने में पूरे एक साल का समय लिया गया। इस दौरान कला और शिल्प की हर बारीकी पर ध्यान दिया गया है। कार्ड के प्रत्येक हिस्से में खास धार्मिक प्रतीक और देवताओं के चित्र उकेरे गए हैं, जो इसे और भी खास बनाते हैं।

धार्मिक प्रतीक और देवताओं की झांकी

इस चांदी के कार्ड की ऊपरी सतह पर भगवान गणेश की सुंदर मूर्ति उकेरी गई है, जो शादी के शुभारंभ का प्रतीक माने जाते हैं। दाहिनी ओर माता पार्वती और बाईं ओर भगवान शिव की शांति और सामंजस्य की प्रतीक आकृतियाँ बनाई गई हैं। इसके साथ ही, माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु के चित्र भी दर्शाए गए हैं। पूरे कार्ड में अन्य धार्मिक देवी-देवताओं के चित्र के अलावा तिरुपति बालाजी के स्वरूप को भी दिखाया गया है।

उत्कृष्ट शिल्पकला की मिसाल

इस खास कार्ड को बनाने के लिए 128 चांदी के टुकड़ों को जोड़कर तैयार किया गया है, और इसे बिना किसी कील या पेच का इस्तेमाल किए बनाया गया है, जो शिल्पकला का अद्भुत उदाहरण है। कार्ड के भीतर धार्मिक कृतियों और पौराणिक घटनाओं को जीवंत रूप में दर्शाया गया है, जैसे कि राम दरबार, शिव विवाह, राधा-कृष्ण की लीलाएँ, और भगवान विष्णु के अवतार।

कलात्मक और सांस्कृतिक समागम

इस कार्ड के बीच में दुल्हन श्रुति जौहरी और दूल्हे हर्ष सोनी के नाम खूबसूरती से उकेरे गए हैं, जबकि उनके चारों ओर हाथी पुष्प वर्षा करते हुए दिखाए गए हैं, जो विवाह की खुशी और मंगलकामना को व्यक्त करते हैं। कार्ड के बाहरी हिस्से में अष्टलक्ष्मीजी और उनकी सेविकाओं का चित्रण भी किया गया है।

चांदी के कार्ड का पीछे का आर्टवर्क

इस अनोखे कार्ड के पीछे तिरुपति बालाजी की भव्य प्रतिमा है, जो सूर्यदेव के प्रकाशमान रूप में उकेरी गई है। इस कार्ड में कुल 65 देवी-देवताओं के चित्र हैं, जिनमें हाथी, घोड़े, मोर और अन्य जीव-जंतुओं की आकृतियाँ भी शामिल हैं। शिव जौहरी, जिन्होंने इस कार्ड को बनाने का श्रेय लिया, ने इसे एक साल की कड़ी मेहनत और धैर्य से तैयार किया है।

दक्षिण भारतीय शैली की प्रेरणा

इस कार्ड की विशेषता केवल धार्मिक प्रतीकों तक सीमित नहीं है। इसमें दक्षिण भारतीय शैली में कृष्ण भगवान के विशेष स्वरूप बनाए गए हैं, जिसमें कृष्ण के एक मुख और पांच धड़ दर्शाए गए हैं, और चारों ओर आठ गायें उन्हें निहारती हुई दिखाई देती हैं।