UP Kiran,Digital Desk: यूएसए प्रेसिडेंट ट्रंप ने जिनेवा में होने वाली महत्वपूर्ण परमाणु वार्ता से पहले ईरान को कड़ा संदेश दिया। वॉशिंगटन डीसी में पत्रकारों से बात करते हुए, ट्रंप ने स्पष्ट किया कि अगर ईरान ने समझौते को नजरअंदाज किया, तो इसके गंभीर परिणाम होंगे। ट्रंप ने इस बात का उल्लेख किया कि वह इस बातचीत में "अप्रत्यक्ष रूप से" शामिल रहेंगे, और इन वार्ताओं को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। उनका मानना था कि यदि ईरान समय पर सही कदम उठाता, तो अमेरिका को अपनी सैन्य ताकत का इस्तेमाल करने की आवश्यकता नहीं होती।
सैन्य कार्रवाई के प्रभाव
ट्रंप ने हाल ही में की गई सैन्य कार्रवाई को एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में प्रस्तुत किया। उनके अनुसार, इस कार्रवाई ने ईरान को कूटनीतिक रास्ते पर लौटने के लिए मजबूर किया, और अब ईरान को बातचीत की मेज पर लौटने के लिए आर्थिक और राजनीतिक दबावों का सामना करना पड़ रहा है। ट्रंप ने विश्वास जताया कि आने वाले समय में ईरान ज्यादा समझदारी से कदम उठाएगा।
मिडल ईस्ट में शांति का दावा
मिडल ईस्ट की स्थिति पर टिप्पणी करते हुए, ट्रंप ने कहा कि हालांकि कुछ स्थानों पर तनाव देखा जा सकता है, मगर क्षेत्र में कुल मिलाकर शांति कायम है। उन्होंने यह भी बताया कि हालिया सैन्य कार्रवाई के बाद परमाणु क्षमता पर हमला कर के शांति स्थापित की गई। उनका दावा था कि यह कदम जरूरी था, क्योंकि इसके बिना ईरान एक महीने के भीतर परमाणु हथियार बना सकता था।
Operation Midnight Hammer का बचाव
ट्रंप ने ऑपरेशन मिडनाइट हैमर का पूरी तरह से बचाव किया। इस ऑपरेशन के तहत, अमेरिका ने ईरान के तीन प्रमुख परमाणु ठिकानों – फोर्डो, नतांज, और इस्फहान – को निशाना बनाया। ट्रंप का कहना था कि अगर यह हमला नहीं किया जाता, तो ईरान अपने परमाणु हथियारों को और तेज़ी से विकसित कर सकता था।


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