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Up kiran,Digital Desk : पाकिस्तान का आर्थिक केंद्र कहा जाने वाला कराची शहर इन दिनों एक गंभीर ऊर्जा संकट की चपेट में है। लगातार दूसरे सप्ताह शहर के बड़े हिस्से में अघोषित गैस कटौती (Unannounced Gas Outage) ने आम जनता का जीना मुहाल कर दिया है। सुई सदर्न गैस कंपनी (SSGC) द्वारा आपूर्ति के दावों और जमीनी हकीकत के बीच गहरा अंतर साफ नजर आ रहा है, जिसके कारण लोग अब सड़कों पर रोटी और एलपीजी (LPG) के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

घरों में खाना पकाना हुआ मुमकिन नहीं

बिना किसी पूर्व सूचना के गैस बंद होने के कारण कराची के घरों में चूल्हे ठंडे पड़ गए हैं। सबसे बुरा हाल कामकाजी महिलाओं और छात्रों का है, जिन्हें बिजली-पानी की किल्लत के साथ अब भूखे पेट रहने की नौबत आ गई है।

लंबी कतारें: लोग सुबह से ही तंदूरों और होटलों के बाहर रोटी-नान खरीदने के लिए लाइनों में लग रहे हैं।

LPG की किल्लत: जो लोग छोटे सिलेंडर भरवाने पहुंच रहे हैं, उन्हें वहां भी घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। सुल्तानबाद के निवासियों ने बताया कि एलपीजी स्टेशनों पर भी सिलेंडरों की भारी कमी देखी जा रही है।

SSGC का दावा: "आपूर्ति में कोई कमी नहीं"

जनता की नाराजगी के बीच, सुई सदर्न गैस कंपनी (SSGC) ने एक आधिकारिक बयान जारी कर सभी आरोपों को खारिज कर दिया है। कंपनी का कहना है कि:

भोजन के समय (नाश्ता, दोपहर और रात का खाना) गैस की निर्बाध आपूर्ति की जा रही है।

RLNG (री-गैसीफाइड लिक्विफाइड नेचुरल गैस) की कमी के बावजूद प्रबंधन संतुलित है।

सिस्टम में गैस का दबाव बिल्कुल सामान्य है और उन्हें किसी बड़े इलाके से कटौती की शिकायत नहीं मिली है।

सियासत गरमाई: "कराची के साथ हो रहा सौतेला व्यवहार"

गैस संकट को लेकर विपक्षी दलों ने सिंध सरकार और गैस कंपनी पर तीखे हमले बोले हैं:

MQM-P का रुख: विपक्षी नेता अली खुर्शीदी ने कहा कि SSGC पहले से ही महंगाई से त्रस्त जनता पर अतिरिक्त बोझ डाल रही है। उन्होंने इसे कंपनी की 'घोर अकुशलता' करार दिया।

PTI का हमला: पीटीआई कराची डिवीजन की सूचना सचिव फौजिया सिद्दीकी ने कहा कि कराची देश के राजस्व में 65% का योगदान देता है, लेकिन फिर भी यहां के लोग पानी, बिजली और अब गैस जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। उन्होंने इसे सिंध सरकार की जनविरोधी नीतियों का परिणाम बताया।

कराची पर दोहरी मार

कराची पहले से ही जर्जर बुनियादी ढांचे और बिजली संकट से जूझ रहा है। अब गैस की इस अघोषित किल्लत ने औद्योगिक और घरेलू दोनों क्षेत्रों की कमर तोड़ दी है। नागरिकों की मांग है कि सरकार तत्काल प्रभाव से इस समस्या का समाधान करे और जर्जर गैस पाइपलाइनों की मरम्मत कराए ताकि रमजान और आने वाले दिनों में स्थिति और भयावह न हो।