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Up Kiran,Digital Desk: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत 2026-27 के यूनियन बजट में किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है। यह बजट न केवल कृषि क्षेत्र के विकास को प्रोत्साहित करेगा, बल्कि देश के तटीय और सीमांत इलाकों में भी समृद्धि लाने की दिशा में अहम कदम उठाएगा।

कृषि उत्पादकता और किसान आय में सुधार का लक्ष्य

सरकार ने कृषि उत्पादकता में सुधार और किसान की आय बढ़ाने के लिए कई नई योजनाओं का ऐलान किया है। इनमें तटीय और सीमांत क्षेत्रों में कृषि की विविधता को बढ़ावा देने के लिए विशेष उपाय किए जाएंगे। इसके साथ ही खेती को ज्यादा लाभकारी बनाने पर जोर दिया गया है।

1. उच्च मूल्य वाली फसलों को प्रोत्साहन

किसानों को अब तटीय इलाकों में नारियल, काजू, कोको जैसे उच्च मूल्य वाले कृषि उत्पादों की खेती में सहायता मिल सकेगी। इससे किसानों की आमदनी में वृद्धि होने की उम्मीद है। इन फसलों का बाजार मूल्य अधिक होने से किसानों को बेहतर मुनाफा मिलेगा।

2. मेवों की खेती को बढ़ावा

वित्त मंत्री ने अखरोट और पाइन नट्स जैसी मेवों की खेती को बढ़ावा देने की बात कही है। इस कदम से किसानों को नए बाजारों में प्रवेश मिलेगा और उनकी आय में वृद्धि होगी। इसके साथ ही कृषि क्षेत्र में विविधता आने से किसानों को मौसम के उतार-चढ़ाव से भी राहत मिलेगी।

3. छोटे किसानों के लिए विशेष योजनाएं

छोटे और सीमांत किसानों की आय बढ़ाने के लिए कई योजनाओं की घोषणा की गई है। उत्पादन क्षमता में वृद्धि और कृषि उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए विशेष उपाय किए जाएंगे। यह किसानों के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोल सकता है।

4. युवाओं के लिए कृषि में अवसर

बजट में कृषि क्षेत्र में युवाओं के लिए रोजगार और प्रशिक्षण के अवसर बढ़ाने पर जोर दिया गया है। सरकार अब युवाओं को आधुनिक कृषि तकनीकों से परिचित कराएगी, जिससे उन्हें न केवल रोजगार मिलेगा, बल्कि वे कृषि क्षेत्र में अपनी उद्यमिता का भी विकास कर सकेंगे।

5. पिछड़े और पूर्वोत्तर राज्यों के लिए विकास

बजट में विशेष ध्यान उन राज्यों पर दिया गया है, जो गरीब हैं या विकास की रफ्तार में पीछे हैं। खासकर पूर्वोत्तर राज्यों में कृषि और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे वहां की सामाजिक और आर्थिक स्थिति में सुधार हो सके।

6. मत्स्य पालन और जलाशय विकास

500 जलाशयों और तालाबों के विकास के माध्यम से मत्स्य पालन को बढ़ावा दिया जाएगा। सरकार ने इस क्षेत्र में महिला नेतृत्व वाले समूहों, स्टार्टअप्स और मछुआरा उत्पादक संगठनों (FPOs) को शामिल करने का फैसला लिया है, जिससे स्थानीय समुदायों को रोजगार और आय के नए अवसर मिल सकेंगे।