Up kiran,Digital Desk : वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इस रविवार संसद में बजट 2026 पेश करेंगी। इस बार का बजट केवल आंकड़ों का लेखा-जोखा नहीं बल्कि भारत की वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच ‘रणनीतिक ढाल’ साबित होगा। अमेरिका में ‘ट्रंप 2.0’ के तहत बढ़ते संरक्षणवादी टैरिफ के बीच भारत खुद को आर्थिक रूप से सुदृढ़ करने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है।
मुख्य पहलू और रणनीति:
विनिर्माण को बढ़ावा: बजट में भारतीय विनिर्माण को 17.3 प्रतिशत से बढ़ाकर 25 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य। इससे ‘मेड इन इंडिया’ उत्पादों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूती मिलेगी।
लॉजिस्टिक्स लागत घटाना: बुनियादी ढांचे पर भारी निवेश कर लॉजिस्टिक्स लागत को जीडीपी के 14 प्रतिशत से घटाकर 8 प्रतिशत करने का लक्ष्य।
‘इंस्पेक्शन राज’ खत्म: नियम-कायदों के बोझिल जाल को हटाकर छोटे तकनीकी उल्लंघनों पर जेल की बजाय आर्थिक जुर्माने की व्यवस्था। ‘जन विश्वास अधिनियम 2.0’ के तहत 100 से अधिक कानूनों में संशोधन संभव।
आपूर्ति पक्ष को मजबूत करना: बजट का जोर अब मांग पैदा करने की बजाय उत्पादन बढ़ाने और भारतीय कारखानों को दुनिया का सबसे शक्तिशाली इंजन बनाने पर।
राजस्व बंटवारा और राज्यों को अधिक वित्तीय स्वायत्तता: 16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट के आधार पर राज्यों की हिस्सेदारी 41 प्रतिशत से बढ़कर 44 प्रतिशत तक होने की संभावना।
वैश्विक आर्थिक तैयारी:
विनिर्माण और स्टील-टेक्सटाइल सेक्टर पर फोकस कर अमेरिका और अन्य देशों के टैरिफ का मुकाबला।
भारत की आंतरिक क्रय शक्ति को बढ़ाकर विदेशी निर्भरता घटाना।
व्यापार सुगमता और गैर-अपराधीकरण के जरिए निवेश आकर्षित करना।
सरकारी दृष्टिकोण:
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुताबिक, धन सृजन करने वालों पर भरोसा बढ़ाने और ‘स्व-प्रमाणन’ की नई संस्कृति को अपनाने की दिशा में यह बजट एक मील का पत्थर साबित हो सकता है।




