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Up kiran,Digital Desk : उत्तर प्रदेश में वोटर लिस्ट को साफ-सुथरा बनाने के लिए एक बहुत बड़ा अभियान चल रहा है, जिसके तहत तीन करोड़ से भी ज्यादा वोटरों के नाम लिस्ट से हटाए जा सकते हैं। चुनाव आयोग की इस मुहिम का मकसद उन लोगों के नाम हटाना है, जो अब अपने पते पर नहीं रहते, कहीं और शिफ्ट हो गए हैं, या जिनकी मौत हो चुकी है।

20% से ज्यादा वोटर "लापता"

अब तक जिलों से जो शुरुआती रिपोर्टें आ रही हैं, वे काफी चौंकाने वाली हैं। पता चला है कि राज्य के कुल वोटरों में से 20% से ज्यादा ऐसे हैं जो "अनुपस्थित, स्थानांतरित या मृतक" (ASD) कैटेगरी में आते हैं। यानी, हर पांच में से एक वोटर का नाम लिस्ट से कट सकता है। लखनऊ और गाजियाबाद जैसे बड़े शहरों में तो यह आंकड़ा 25 से 30 प्रतिशत तक पहुंचने की आशंका है।

यह अभियान विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) कार्यक्रम के तहत चलाया जा रहा है। 27 अक्टूबर 2025 तक उत्तर प्रदेश में कुल 15 करोड़ 44 लाख से ज्यादा वोटर दर्ज थे। अब इस सफाई अभियान के बाद यह आंकड़ा काफी नीचे आ जाएगा।

इन जिलों ने पूरा किया काम

औरैया, आजमगढ़ और एटा जैसे जिलों ने अपना 100% काम पूरा भी कर लिया है। अकेले एटा जिले में ही करीब 13 लाख वोटरों में से 18% यानी लगभग 2.36 लाख नाम हटाए जाने के लिए चिह्नित किए गए हैं। इनमें सबसे ज्यादा संख्या उन लोगों की है जो अपना घर बदलकर कहीं और शिफ्ट हो गए हैं। पूरे प्रदेश का मोटा-मोटा हिसाब देखें तो, लिस्ट से करीब 10% शिफ्ट हुए लोग, 6% अपने पते पर न मिलने वाले लोग और 4% मृतकों के नाम हटाए जाएंगे।

CM योगी का सख्त निर्देश- 'एक भी गलत वोट न बने'

मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी अधिकारियों और पार्टी के नेताओं के साथ बैठक की है। उन्होंने सख्त निर्देश दिए हैं कि इस अभियान में इस बात का पूरा ध्यान रखा जाए कि एक भी वोट गलत तरीके से न बने और न ही कटे।

सीएम योगी ने यह भी कहा कि विपक्ष इस अभियान को लेकर "वोट काटे जाने" और "वोट चोरी" जैसी अफवाहें फैला सकता है। उन्होंने अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं से कहा है कि वे जनता के बीच जाकर इन अफवाहों को दूर करें और लोगों को वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने या सही करवाने में मदद करें।

11 दिसंबर तक इस अभियान के तहत फॉर्म जमा किए जाने थे, जिसके बाद अब इन चिह्नित नामों को लिस्ट से हटाने का काम तेजी से किया जाएगा।