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Up kiran,Digital Desk : तमिलनाडु के मदुरै में स्थित थिरुपरनकुंद्रम पहाड़ी पर दीपम जलाने की परंपरा को लेकर चल रहा विवाद अब राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है। मद्रास हाईकोर्ट द्वारा दीपथून में दीप जलाने की अनुमति को बरकरार रखने के फैसले के बाद भाजपा ने इसे श्रद्धालुओं की जीत बताया है। साथ ही पार्टी ने डीएमके सरकार पर सनातन धर्म के प्रति विरोधी रवैया अपनाने का आरोप लगाया है।

थिरुपरनकुंद्रम पहाड़ी भगवान मुरुगन से जुड़ी आस्था का प्रमुख केंद्र रही है, जहां सदियों से दीपम जलाने की परंपरा चली आ रही है। इस साल दीप जलाने पर रोक लगाए जाने के बाद श्रद्धालुओं ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। मद्रास हाईकोर्ट के एकल न्यायाधीश जी.आर. स्वामीनाथन ने 1 दिसंबर 2025 को दीप जलाने की अनुमति दी थी। इसके बाद राज्य सरकार ने इस आदेश को चुनौती दी, लेकिन मदुरै पीठ ने एकल न्यायाधीश के फैसले को बरकरार रखा।

इस फैसले के बाद दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने डीएमके सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि डीएमके लंबे समय से सनातन धर्म का मजाक उड़ाती रही है। गोयल ने सितंबर 2023 में उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन के उस बयान का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने सनातन धर्म को खत्म करने की बात कही थी। उनके मुताबिक, इसके कुछ महीनों बाद भगवान मुरुगन से जुड़े पर्वत पर दीप जलाने पर रोक लगाया जाना संयोग नहीं माना जा सकता।

पीयूष गोयल ने यह भी कहा कि श्रद्धालुओं को अपने धार्मिक अधिकारों के लिए अदालत जाना पड़ा और न्यायालय ने उनके पक्ष में फैसला दिया। इसके बावजूद राज्य सरकार का उस फैसले के खिलाफ अपील में जाना डीएमके की सोच को दर्शाता है। भाजपा का आरोप है कि मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन, उदयनिधि स्टालिन और पार्टी के अन्य नेता लगातार सनातन धर्म को लेकर बयानबाजी करते रहे हैं।

हाईकोर्ट के फैसले से श्रद्धालुओं को राहत जरूर मिली है और अब थिरुपरनकुंद्रम पहाड़ी पर दीपम जलाने की परंपरा जारी रहेगी। भाजपा इसे आस्था और धार्मिक स्वतंत्रता की जीत बता रही है। वहीं, इस फैसले के बाद तमिलनाडु की राजनीति में धर्म और विचारधारा को लेकर बहस और तेज हो गई है। आने वाले समय में इस मुद्दे पर डीएमके और भाजपा के बीच सियासी टकराव और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।