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Up Kiran, Digital Desk: भारत ने अपने अंतरिक्ष कार्यक्रम में एक और ऐतिहासिक कदम बढ़ाते हुए अंतरिक्ष में अपनी स्थायी उपस्थिति सुनिश्चित करने की दिशा में काम शुरू कर दिया है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने स्वदेशी स्पेस स्टेशन के निर्माण की योजना को तेज कर दिया है, जो न केवल देश के वैज्ञानिकों के लिए बल्कि आने वाली पीढ़ी के लिए भी बड़ी उम्मीदें जगाता है। इस परियोजना का नाम भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (Bharatiya Antariksh Station – BAS) रखा गया है, और इसका पहला मॉड्यूल 2028 तक अंतरिक्ष में भेजे जाने की योजना है।

भारतीय कंपनियों को मिला बड़ा मौका

इसरो ने हाल ही में भारतीय कंपनियों से अपने पहले स्पेस स्टेशन मॉड्यूल BAS-01 के निर्माण में सहयोग की अपील की है। विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (VSSC) ने एक ‘एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट’ (EoI) जारी कर इन कंपनियों को यह मौका दिया है। यह पहला अवसर है जब भारत ने अपने स्थायी मानवयुक्त अंतरिक्ष स्टेशन के निर्माण के लिए औपचारिक कदम उठाया है। इस परियोजना के तहत, भारत अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) की तर्ज पर अपना एक स्वदेशी स्पेस स्टेशन तैयार करेगा, लेकिन इसमें इस्तेमाल होने वाली हर तकनीक और संसाधन भारतीय होंगे।

गगनयान मिशन के बाद का अगला कदम

ISRO के अधिकारियों के अनुसार, भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन गगनयान मिशन के बाद का अगला महत्वपूर्ण कदम है। जहां गगनयान मिशन के तहत भारत अपने अंतरिक्ष यात्रियों को पृथ्वी की कक्षा में भेजने की तैयारी कर रहा है, वहीं BAS के जरिए भारत का उद्देश्य अंतरिक्ष में लंबे समय तक मानव उपस्थिति स्थापित करना है। इस स्पेस स्टेशन के निर्माण से भारत न केवल अंतरिक्ष तक पहुंच बनाएगा, बल्कि वहां वैज्ञानिक अनुसंधान और नई तकनीकों के परीक्षण के लिए भी एक स्थायी आधार बनाएगा।