Up Kiran, Digital Desk: अगर आपके दिल में भी एक कहानी है, जिसे आप दुनिया को दिखाना चाहते हैं... अगर आपके हाथ में कैमरा या मोबाइल है और नजरों में एक अनोखा फ्रेम... तो यह खबर आपके लिए ही है. बेंगलुरु में एक ऐसा मंच सजने जा रहा है, जो आप जैसे युवा और उभरते हुए फिल्ममेकर्स और कंटेंट क्रिएटर्स को उनके सपनों की उड़ान भरने का मौका देगा. हम बात कर रहे हैं TIFA 2025 की, यानी तक्षशिला इंस्टीट्यूशन फाउंडेशन फॉर आर्ट्स फिल्म फेस्टिवल की.
यह सिर्फ एक फिल्म फेस्टिवल नहीं है, बल्कि एक ऐसा इकोसिस्टम है, जिसे खास तौर पर नए टैलेंट को खोजने, उन्हें तराशने और दुनिया के सामने लाने के लिए बनाया गया है. जैन (डीम्ड-टू-बी यूनिवर्सिटी) के सहयोग से आयोजित हो रहा यह फेस्टिवल आपके करियर के लिए एक गेम-चेंजर साबित हो सकता है.
क्या है TIFA 2025 और यह आपके लिए क्यों ख़ास है?
TIFA का मकसद बिल्कुल साफ है - भारत की उभरती हुई क्रिएटिव आवाज को एक ग्लोबल प्लेटफॉर्म देना.
किसके लिए है यह मौका?: यह फेस्टिवल हर उस व्यक्ति के लिए है जो शॉर्ट फिल्में, डॉक्यूमेंट्री, म्यूजिक वीडियो या किसी भी तरह का डिजिटल कंटेंट बनाता है. चाहे आप एक स्टूडेंट हों, शौकिया फिल्ममेकर हों या फिर एक प्रोफेशनल जो अपनी पहचान बनाना चाहता है, यह मंच आपके लिए खुला है.
सिर्फ फिल्म दिखाना नहीं, सिखाना भी: TIFA सिर्फ आपकी फिल्में दिखाने का मौका नहीं देता, बल्कि यहां आपको इंडस्ट्री के बड़े नामों से सीखने का भी अवसर मिलेगा. फेस्टिवल के दौरान कई तरह के वर्कशॉप, मास्टरक्लास और पैनल डिस्कशन होंगे, जहां आप फिल्म मेकिंग की बारीकियों को सीधे एक्सपर्ट्स से समझ सकते हैं.
नेटवर्किंग का सुनहरा मौका: यहां आपको अपने जैसे दूसरे क्रिएटर्स, प्रोड्यूसर्स और इंडस्ट्री के प्रोफेशनल्स से मिलने का मौका मिलेगा. एक अच्छी नेटवर्किंग आपके करियर को कहां से कहां पहुंचा सकती है, यह बताने की ज़रूरत नहीं.
हम कल के कहानीकारों को ताकत देना चाहते हैं
TIFA की फाउंडर, श्रीमती नूतन पति ने इस फेस्टिवल के विजन के बारे में बात करते हुए कहा, भारत में टैलेंट की कोई कमी नहीं है. हमारा मकसद उन छिपे हुए हीरों को खोजना और उन्हें एक ऐसा प्लेटफॉर्म देना है, जहां उनकी कला को पहचान मिले. हम सिर्फ एक फिल्म फेस्टिवल नहीं बना रहे हैं, हम एक ऐसा समुदाय बना रहे हैं, जहां कलाकार एक-दूसरे से सीखें, आगे बढ़ें और दुनिया को अपनी कहानियां दिखाएं.
जैन (डीम्ड-टू-बी यूनिवर्सिटी) के डायरेक्टर, डॉ. शंकर यू अय्यप्पन ने भी इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह अकादमिक और क्रिएटिव इंडस्ट्री के बीच की दूरी को कम करने का एक बेहतरीन प्रयास है.
तो, अगर आप भी अपने कंटेंट को एक बड़े ऑडियंस तक पहुंचाना चाहते हैं और अपने पैशन को प्रोफेशन में बदलना चाहते हैं, तो TIFA 2025 पर अपनी नजर बनाए रखें. यह वह मौका हो सकता है, जिसका आप सालों से इंतजार कर रहे थे. अपनी शॉर्ट फिल्म तैयार रखें, अपनी कहानी को धार दें, क्योंकि स्टारडम का दरवाजा शायद यहीं से खुलने वाला है.
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