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Up Kiran,Digital Desk: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले में अब परिषदीय स्कूलों में कार्यरत दिव्यांग शिक्षकों के शैक्षिक और दिव्यांग प्रमाण-पत्रों की गहन जांच की जाएगी। इस जांच का प्रमुख उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि केवल योग्य और असल दिव्यांग शिक्षक ही सरकारी नौकरी के लाभ का फायदा उठाएं। विभाग की ओर से यह कदम फर्जी प्रमाण-पत्रों के आधार पर नौकरी प्राप्त करने वालों के खिलाफ उठाया गया है, ताकि शिक्षा क्षेत्र में पारदर्शिता बनी रहे।

आधिकारिक निर्देशों के तहत कार्रवाई
बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, बीएसए डॉ. रामजियावन मौर्य ने डीजी स्कूल शिक्षा के पत्र के आधार पर सभी बीईओ को निर्देश दिया है कि वे अपने-अपने ब्लॉकों में तैनात दिव्यांग शिक्षकों की सूची तैयार करें और उनके प्रमाण-पत्रों का सत्यापन कर रिपोर्ट प्रस्तुत करें। यदि किसी शिक्षक के दस्तावेज़ में अनियमितता पाई जाती है तो उसकी सेवा समाप्त कर दी जाएगी।

संदिग्ध मामलों पर विशेष ध्यान
यह जांच विशेष रूप से उन मामलों पर ध्यान केंद्रित करेगी जहां प्रमाण-पत्रों में कोई धोखाधड़ी हो सकती है। अधिकारियों का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य न केवल प्रशासनिक सुधार लाना है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि दिव्यांग शिक्षक कोटे का असली लाभ उन व्यक्तियों तक पहुंचे जो वास्तव में इसकी आवश्यकता रखते हैं।

दिव्यांग शिक्षकों के लिए एक बड़ा कदम
विभाग का मानना है कि यह कदम उन ईमानदार और योग्य शिक्षकों के हक में उठाया गया है जो दिव्यांग कोटे के तहत अपनी नौकरी में योगदान दे रहे हैं। यह कार्रवाई न केवल अवैध तरीकों से नौकरी पाने वालों के खिलाफ है, बल्कि इस प्रक्रिया से परिषदीय स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने में भी मदद मिलेगी।