(पवन सिंह)
ये वो राजेश्वर नहीं हैं जिनके नाम का अर्थ होता है-राजाओं का स्वामी, शासकों का शासक या देवताओं का राजा...ये "वो" राजेश्वर सिंह हैं जिनके भीतर शायद एक "गांधी" जिंदा है..जो सबकी बात करता है। मैं राजेश्वर सिंह के बारे में पढ़ता रहता हूं और सोचता हूं कि देश का हर विधायक/सांसद/मंत्री/ग्राम प्रधान...वह डगर क्यों नहीं चल सकता जो राजेश्वर सिंह ने चुनी और जो सामाजिक दायरा राजेश्वर सिंह ने अपने दयार के लिए बुना। आदमी "वह भी" "वही" हैं और आदमी और भी हैं लेकिन लीक से अलहदा खरामा-खरामा अपनी एक नज़ीर पैबस्त करने के किस्से को गूंथते-बांधते और मुर्री चढ़ाते राजेश्वर सिंह भारतीय राजनीति की कालिख पर एक "उजली लकीर" खींच रहे हैं। Rajeshwar Singh @RajeshwarSingh.in

कुछ दिन पूर्व उन्होंने फिर से खामोशी के साथ अपने विधानसभा क्षेत्र सरोजनीनगर में मानसिक स्वास्थ्य पर एक बड़ा कार्यक्रम किया। ठाना कि जब चारों ओर नकारात्मकता, निराशा, हताशा, कुंठा हो तो क्यों न शिक्षण संस्थानों में मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता शिविर आयोजित किए जाएं। बंदा निकल पड़ा है मुहिम पर!! यक़ीनन इस वक्त जरा-जरा सी बात पर हिंसा और हत्याओं व आत्महत्याओं का जो भयावह सिलसिला शुरू हुआ है, वह सोसायटी के लिए चुनौती है, खतरा है!! ऐसे में राजेश्वर सिंह ने दिमाग के रास्ते दिल तक उतरने की जो राह खोलने की कोशिश शुरू की है, वह क्या रंग दिखाती है, यह वक्त के सिरहाने है..!!! लेकिन भावुकता, सहजता, आत्मविश्वास, कुछ कर गुजरने के भाव, दृढ़ता, सजगता..के भाव बच्चों में आरंभ से ही कैसे भरें जाएं यह कोशिश एक यज्ञ है। Rajeshwar Singh @RajeshwarSingh.in
आज के दौर में मानसिक स्वास्थ्य, दिमागी अधेड़ बुन.. महज एक चिकित्सीय विषय नहीं, बल्कि एक सामाजिक चुनौती बन चुका है और इससे टकराने की अब बड़ी जरूरत है। राजेश्वर सिंह ने फिर से अपनी भामाशाह को पोटली खोली यानी CSR फंड से 10 लाख रुपये की राशि से शुभारंभ कर दिया। राजेश्वर सिंह ने बहुत दूर तक सोचा है कि मानसिक स्वास्थ्य, अवसाद एवं भावनात्मक चुनौतियों पर आधारित एक संक्षिप्त पाठ्यक्रम कैसे तैयार हो और उसे कक्षा 10 की सामाजिक विज्ञान की पुस्तकों में शुमार कराया जाए। साथ ही काउंसलिंग सेवाओं को 24×7 जारी रखना...भी शामिल है।
"विधायक विध डिफरेंट आइडियाज"राजेश्वर सिंह
अब एक व्हाट्सएप समूह बनाने जा रहे हैं ताकि जरूरतमंद मरीजों को तुरंत सहायता मिल सके। ये राजेश्वर सिंह ही हैं जिन्होने विगत 4 वर्षों में 1300 से अधिक रोगियों को लगभग 25 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता मुख्यमंत्री राहत कोष से दिलवाई है।
कोई मायने नहीं रखता कि आप का विधान सभा क्षेत्र क्या है? कोई मायने नहीं रखता कि आप की बिरादरी क्या है और मजहब क्या है..?? विषय जेन्यूइन है और समस्या जेन्यूइन है, तो राजेश्वर सिंह का एक पैड, कलम और मोहर .. हस्ताक्षर के साथ तैयार है...!!! ले जाइए..!!! न ले जाइए तो संबंधित मंत्री/अधिकारी को पोस्ट कर दी जाएगी..!!! फोन करवाना चाहते हैं, वह भी हो जाएगा..!!! पत्रकारों की पेंशन का मामला जिस तरह से राजेश्वर सिंह ने उठाया है और वह इस विषय पर पुरजोर तरीके से लगे, ऐसी आवाज आज तक कहीं से नहीं उठी..!!! अख़बारनवीस हमेशा खद्दर की आवाज छापता, दिखाता, बोलता...रहा लेकिन उसकी नून-तेल की चिंता में कोई खद्दर धारी कभी शरीक न हुआ..!!! किसी ने भी उसकी पीड़ा का, उसकी जरूरतों का एहसास तक न किया लेकिन राजेश्वर सिंह ने किया ...!!! Rajeshwar Singh @RajeshwarSingh.in
दो शेर नज़र हैं-
मत सहल हमें जानो फिरता है फ़लक बरसों,
तब ख़ाक के पर्दे से इंसान निकलते हैं।
बकौल- मीर तक़ी मीर
और...
"आदमी का आदमी हर हाल में हमदर्द हो,
इक तवज्जोह चाहिए इंसाँ को इंसाँ की तरफ़"
बकौल-हफ़ीज़ जौनपुरी
कभी राजेश्वर सिंह से मेरा साबिका न रहा न मैं रू-ब-रू हुआ... लेकिन कह सकता हूं कि कुछ इंसान अभी भी बस्तियों में रहते हैं।




