img

UP Kiran,Digital Desk: हिंदुस्तान अपनी हवाई सुरक्षा को अगले कुछ महीनों में एक नई ऊंचाई पर पहुंचाने जा रहा है। रूस के साथ 2018 में हुए एक अहम रक्षा समझौते के तहत खरीदे गए S-400 Triumf सिस्टम की डिलीवरी अब निर्धारित समय पर पूरी होगी। यह व्यवस्था भारतीय सेना के लिए एक बड़ा और महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।

S-400 की डिलीवरी: समय सीमा का पालन
रक्षा सूत्रों के अनुसार, इस प्रणाली की कुल पांच स्क्वाड्रनों में से चौथा स्क्वाड्रन 2026 के जून महीने तक भारत पहुंच जाएगा, जबकि अंतिम सिस्टम नवंबर 2026 तक हमारे देश में तैनात हो जाएगा। रूस-यूक्रेन युद्ध की वजह से कुछ समय के लिए आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान आया था, लेकिन अब भारत को अपनी हवाई सुरक्षा को मजबूत करने के लिए नए उपकरण मिलने का रास्ता साफ हो चुका है।

दुनिया की सबसे शक्तिशाली वायु रक्षा प्रणाली
S-400 Triumf को विश्व की सबसे उन्नत और प्रभावशाली लंबी दूरी की वायु रक्षा प्रणालियों में गिना जाता है। यह सिस्टम 400 किलोमीटर तक की दूरी पर ड्रोन, विमान, क्रूज और बैलिस्टिक मिसाइल जैसे लक्ष्यों को ट्रैक और नष्ट करने की क्षमता रखता है। इसकी सबसे खास बात यह है कि यह एक साथ कई अलग-अलग लक्ष्यों को एक समय में ट्रैक कर सकता है और अगर जरूरत पड़े तो उन्हें नष्ट भी कर सकता है।

भारत की एयर डिफेंस संरचना में बदलाव
जब S-400 के सभी पांचों सिस्टम पूरी तरह से सक्रिय हो जाएंगे, तो भारत की बहु-स्तरीय हवाई सुरक्षा बहुत मजबूत हो जाएगी। इस सिस्टम को स्वदेशी Akash missile और MRSAM जैसी प्रणालियों के साथ मिलाकर एक समग्र रक्षा कवच तैयार किया जा रहा है। इससे खासतौर पर भारत की उत्तरी और पश्चिमी सीमाओं पर संभावित हवाई खतरे को बेअसर करने की क्षमता में वृद्धि होगी। इस संयोजन से भारत को एक साथ कई दिशाओं से आने वाले हमलों के खिलाफ मजबूत प्रतिक्रिया देने में मदद मिलेगी।