Up kiran,Digital Desk : पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष अब एक ऐसे मोड़ पर आ गया है जहां पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था दांव पर लगी है। पिछले दो महीनों से जारी युद्ध के बीच ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को खोलने के लिए अमेरिका के सामने 'तीन सूत्री शांति प्रस्ताव' रखा है। हालांकि, तेहरान के तेवरों से साफ है कि वह डोनाल्ड ट्रंप की धमकियों के आगे झुकने को तैयार नहीं है।
ईरान की वो 3 शर्तें, जिन पर टिका है दुनिया का भविष्य
ईरानी नेतृत्व ने पाकिस्तान और ओमान के जरिए अमेरिका को अपना नया मसौदा भेजा है। इसमें मुख्य रूप से तीन मांगें की गई हैं:
पोर्ट और समुद्री नाकेबंदी का खात्मा: ईरान चाहता है कि उसके बंदरगाहों पर लगी अमेरिकी मोर्चाबंदी तुरंत हटाई जाए और ईरानी जहाजों को अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में स्वतंत्र रूप से आने-जाने की अनुमति मिले।
युद्धपोतों की वापसी: होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास तैनात अमेरिकी नौसेना के बेड़ों और युद्धपोतों को पीछे हटाया जाए।
परमाणु वार्ता को टालना: ईरान की सबसे बड़ी शर्त यह है कि परमाणु कार्यक्रम (Nuclear Program) पर बातचीत फिलहाल रोक दी जाए। ईरान का तर्क है कि पहले व्यापारिक रास्ते खुलें और शांति बहाल हो, परमाणु मुद्दे पर भविष्य में चर्चा की जाएगी।
ट्रंप की 'डेडलाइन' और पाइपलाइन ध्वस्त करने की धमकी
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के इस प्रस्ताव से बिल्कुल भी खुश नजर नहीं आ रहे हैं। एपी (AP) की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने ईरान को अल्टीमेटम दिया है कि यदि अगले 3 दिनों के भीतर समझौता नहीं हुआ, तो अमेरिकी वायुसेना ईरान की तेल पाइपलाइनों को निशाना बनाना शुरू कर देगी। ट्रंप प्रशासन का मानना है कि परमाणु मुद्दे को टाले बिना कोई भी समझौता अमेरिका के हितों के खिलाफ होगा।
व्हाइट हाउस में हाई-लेवल मीटिंग और रूबियो का बयान
सोमवार को राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने राष्ट्रीय सुरक्षा दल (National Security Team) के साथ लंबी बैठक की। व्हाइट हाउस की प्रवक्ता कैरोलिन लीविट ने संकेत दिए हैं कि ट्रंप जल्द ही इस पर कोई बड़ा फैसला ले सकते हैं। वहीं, विदेश मंत्री मार्को रूबियो का मानना है कि ईरान केवल समय काटने की कोशिश कर रहा है। रूबियो ने 'फॉक्स न्यूज' से कहा कि ईरानी वार्ताकार मौजूदा आर्थिक संकट से बाहर निकलने के लिए छटपटा रहे हैं, लेकिन वे अपनी शर्तों पर समझौता चाहते हैं।
क्यों अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया की 'तेल की नस' मानी जाती है। वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20% हिस्सा इसी संकरे रास्ते से होकर गुजरता है। यदि यह मार्ग लंबे समय तक बंद रहता है, तो दुनिया भर में पेट्रोल-डीजल की कीमतें आसमान छू सकती हैं और वैश्विक सप्लाई चेन पूरी तरह ध्वस्त हो सकती है। फिलहाल, अमेरिकी नौसेना के तीन विमानवाहक पोत इलाके में गश्त कर रहे हैं, जो किसी भी वक्त बड़े हमले के लिए तैयार हैं।




