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Up kiran,Digital Desk : पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष के 33वें दिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक ऐसा दावा किया है जिसने पूरी दुनिया में खलबली मचा दी है। ट्रंप ने बुधवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर पोस्ट करते हुए कहा कि ईरान की नई सरकार ने अमेरिका से युद्धविराम (Ceasefire) की गुजारिश की है। हालांकि, ट्रंप ने शांति के इस प्रस्ताव के साथ एक ऐसी कड़ी शर्त जोड़ दी है, जिसने तेहरान की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

होर्मुज जलडमरूमध्य खोलो, वरना तबाही के लिए रहो तैयार: ट्रंप

डोनाल्ड ट्रंप ने अपने संबोधन में साफ शब्दों में कहा कि वॉशिंगटन युद्धविराम के प्रस्ताव पर तभी विचार करेगा, जब 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) पूरी तरह से "खुला, स्वतंत्र और साफ" होगा। ट्रंप ने ईरान के नए शासन को पिछले नेतृत्व की तुलना में कम कट्टर और अधिक समझदार बताते हुए चेतावनी दी, "जब तक हमारी शर्तें पूरी नहीं होतीं, हम ईरान को पूरी तरह तबाह कर देंगे या उसे 'पाषाण युग' (Stone Age) में वापस भेज देंगे।" ट्रंप का यह बयान ईरान की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले तेल मार्ग पर सीधे नियंत्रण की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

ईरान का पलटवार: 'धमकियों की भाषा हमें मंजूर नहीं'

दूसरी ओर, ईरान ने ट्रंप के इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। ईरानी अधिकारियों और विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने स्पष्ट किया है कि राष्ट्रपति की ओर से ऐसी कोई गुजारिश नहीं की गई है। अराघची ने 'अल जज़ीरा' को दिए इंटरव्यू में कहा, "आप ईरान के लोगों से धमकियों और समय-सीमा की भाषा में बात नहीं कर सकते। हम अपनी रक्षा के लिए किसी के पाबंद नहीं हैं और लड़ाई जारी रखने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।" उन्होंने अमेरिकी जमीनी हमले की चुनौती को स्वीकार करते हुए कहा कि "हम उनका इंतजार कर रहे हैं।"

सीधी बातचीत या सिर्फ संदेशों का आदान-प्रदान?

भले ही दोनों देश युद्ध के मैदान में आमने-सामने हों, लेकिन पर्दे के पीछे कूटनीतिक हलचल जारी है। ईरानी विदेश मंत्री ने स्वीकार किया कि वे अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ के सीधे संपर्क में हैं, हालांकि उन्होंने इसे 'बातचीत' मानने से इनकार कर दिया। अराघची के अनुसार, उन्हें विटकॉफ से सीधे मैसेज मिलते हैं, लेकिन अमेरिका पर उनका भरोसा 'जीरो' है। इस बीच, ब्रिटेन जैसे सहयोगियों ने भी इस जंग से दूरी बना ली है, जिससे ट्रंप पर अपनी शर्तों को मनवाने का दबाव बढ़ गया है।