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Up Kiran, Digital Desk: हर चमकती चीज सोना नहीं होती। गुड़ भी सबके लिए फायदेमंद नहीं है। कुछ लोग ऐसे हैं जिन्हें गुड़ बिल्कुल नहीं खाना चाहिए, वरना छोटी-मोटी परेशानी नहीं, बड़ी बीमारी को न्योता दे बैठेंगे। आज हम आपको बताने जा रहे हैं उन सात तरह के लोगों के बारे में जो गुड़ उनके लिए जहर से कम नहीं।

१. डायबिटीज के मरीज बहुत से लोग सोचते हैं गुड़ तो प्राकृतिक है, शुगर वाले खा सकते हैं। गलत! गुड़ में ग्लाइसेमिक इंडेक्स बहुत ऊंचा होता है और सुक्रोज की मात्रा भी भरपूर। खाते ही ब्लड शुगर लेवल आसमान छूने लगता है। डॉक्टर साफ मना करते हैं।

२. जिन्हें बार-बार एसिडिटी होती है खाली पेट गुड़ खाया तो पाचक रस जरूरत से ज्यादा बनने लगते हैं। पेट में खाना न होने से वो रस खुद पेट की दीवार को ही जलाने लगते हैं। सीने में जलन, खट्टी डकारें और बेचैनी तुरंत शुरू।

३. वजन कम करने की कोशिश कर रहे लोग गुड़ में कैलोरी कम नहीं होती भाई। एक छोटा टुकड़ा भी ६०-७० कैलोरी दे देता है। ऊपर से उसमें ग्लूकोज और फ्रुक्टोज भरपूर। रोज थोड़ा-थोड़ा भी खाया तो महीने भर में २-३ किलो वजन बढ़ना पक्का।

४. पेट बहुत संवेदनशील रहता हो गुड़ पाचन को तेज करता है, ये सही है। लेकिन ज्यादा खा लिया तो पाचन तंत्र ओवरटाइम करने लगता है। नतीजा – दस्त, पेट फूलना, गैस और बार-बार टॉयलेट की दौड़। IBS वाले तो बिल्कुल दूर रहें।

५. दांत कमजोर हों या कैविटी की शिकायत हो गुड़ चिपचिपा होता है। दांतों में चिपक जाता है। रात को खाकर सो गए और ब्रश नहीं किया तो सुबह तक बैक्टीरिया पार्टी करते हैं। कैविटी और मसूड़ों की बीमारी को सीधा न्योता।

६. गन्ने या गुड़ से एलर्जी वाले कुछ लोगों को गन्ने के रस से ही एलर्जी होती है। गुड़ खाते ही पेट फूलने लगता है, त्वचा पर लाल चकत्ते पड़ जाते हैं, नाक बहने लगती है या सिरदर्द शुरू हो जाता है। बाजार का गुड़ तो कभी-कभी मिलावटी भी होता है, एलर्जी और बढ़ जाती है।

७. जो लोग बहुत ज्यादा कमजोरी या थकान महसूस करते हैं (हीमोग्लोबिन बहुत कम हो) अगर हीमोग्लोबिन ७-८ से नीचे है तो डॉक्टर पहले आयरन की गोली देते हैं। गुड़ में आयरन तो है लेकिन बहुत कम मात्रा में और वो भी आसानी से अवशोषित नहीं होता। ऐसे में गुड़ पर भरोसा करके इलाज टालोगे तो एनीमिया और बढ़ेगा।