Up Kiran, Digital Desk: सर्दियों का मौसम अपने साथ ढेर सारी ताजगी लेकर आता है, और इस समय घर में किचन गार्डन बनाना एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है। कम जगह में भी आप आसानी से ताजे और स्वास्थ्यवर्धक सब्ज़ियां उगा सकते हैं, चाहे वो बर्तन हों या छत। आइए जानते हैं सर्दियों के लिए सबसे उपयुक्त सब्ज़ियां और उनका उगाने का आसान तरीका।
पालक: सेहत का खजाना
पालक एक ऐसी सब्ज़ी है जो सर्दियों में बेहद लाभकारी होती है। आप इसे बर्तन या ग्रो बैग में भी उगा सकते हैं। इसके बीज सीधे मिट्टी में डालें और गोबर की खाद, मिट्टी और बालू का मिश्रण डालकर इसे उगाएं। पालक को 4–5 घंटे धूप की आवश्यकता होती है। पानी हल्का और नियमित रूप से दें। लगभग 25 से 30 दिनों में ताजे पालक के पत्ते तैयार हो जाएंगे।
गाजर: आसानी से उगाने वाली सब्ज़ी
गाजर को उगाने के लिए 10–12 इंच गहरे बर्तन का इस्तेमाल करें। इसकी बीज को सीधे मिट्टी में बोएं और ध्यान रखें कि ज्यादा पानी न दिया जाए। गाजर को लगभग 70–80 दिनों में काटा जा सकता है। गाजर के ताजे स्वाद का आनंद लेने के लिए इसे उगाना बेहद आसान है और यह सर्दियों में अच्छी तरह से बढ़ता है।
मेथी: कम देखभाल वाली सर्दी की सब्ज़ी
मेथी एक ऐसी सब्ज़ी है जो सर्दियों में कम देखभाल के साथ उगाई जा सकती है। इसके बीज को 6–8 घंटे पानी में भिगोकर बोएं और फिर हल्की धूप में रखें। इस सब्ज़ी को 15–20 दिनों में काट सकते हैं, जिससे आपको ताजे पत्ते मिलेंगे। यह घर के किचन गार्डन में आसानी से उगाई जा सकती है और स्वादिष्ट भी होती है।
हरा प्याज: ताजगी का एहसास
हरा प्याज उगाने के लिए बहुत ही सरल तरीका है। प्याज के जड़ वाले हिस्से को मिट्टी में रोपें और कुछ ही दिनों में इसके पत्ते उगने लगेंगे। 7 से 10 दिनों में हरा प्याज उगना शुरू हो जाता है और आप इसे बार-बार काट सकते हैं। इस सब्ज़ी का उपयोग सलाद या अन्य खाने में किया जा सकता है, जिससे ताजगी मिलती है।
धनिया: छोटे प्रयास में बड़ी खुशी
धनिया का पौधा भी सर्दियों में आसानी से उगाया जा सकता है। इसके बीज को हल्का सा पीसकर बोएं और इसे हल्की धूप में रखें। धनिया 20 से 25 दिनों में तैयार हो जाता है। इसका ताजगी से भरा स्वाद खाने में चार चांद लगा देता है और इसे घर में उगाना बहुत सरल है।
महत्वपूर्ण टिप्स
सप्ताह में एक बार जैविक खाद डालें, इससे पौधों की वृद्धि में मदद मिलेगी।
पौधों को सुबह या शाम के समय पानी दें, ताकि गर्मी का प्रभाव कम हो।
कीटों से बचाव के लिए नीम का तेल छिड़काव करें, जिससे प्राकृतिक रूप से रक्षा हो सके।
जलभराव से बचने के लिए ध्यान रखें कि मिट्टी में अच्छी जल निकासी हो।


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