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Up Kiran, Digital Desk: आजकल की व्यस्त जीवनशैली और काम के दबाव ने रीढ़ की हड्डी के दर्द को एक सामान्य समस्या बना दिया है। बहुत से लोग इसे हल्के में लेते हैं और इसे गलत तरीके से बैठने, अत्यधिक काम करने या उम्र के असर के रूप में स्वीकार कर लेते हैं। लेकिन यदि यह दर्द लगातार बना रहे या बार-बार होता है, तो यह एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या का संकेत हो सकता है। इस आर्टिकल में हम बात करेंगे कि रीढ़ की हड्डी में दर्द के पीछे कौन-कौन सी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं, इसके लक्षण क्या हैं, और इस दर्द को कैसे नियंत्रित किया जा सकता है।

रीढ़ के दर्द का कारण क्या हो सकता है?

अक्सर लोग समझते हैं कि रीढ़ का दर्द केवल सामान्य थकावट या गलत बैठने से होता है, लेकिन डॉक्टरों के मुताबिक, यह कई तरह की बीमारियों का संकेत हो सकता है। कुछ प्रमुख कारणों में शामिल हैं:

स्लिप डिस्क: एक आम समस्या

स्लिप डिस्क रीढ़ की हड्डी से जुड़ी सबसे आम समस्याओं में से एक है। इसमें रीढ़ की डिस्क अपनी जगह से खिसक जाती है, जिससे नसों पर दबाव पड़ता है और तेज दर्द की स्थिति बनती है। यह दर्द कमर से लेकर हाथों और पैरों तक फैल सकता है।

सर्वाइकल और लम्बर स्पोंडिलोसिस: कब जुड़ें दवाइयों का असर?

यह एक ऐसी समस्या है जिसमें गर्दन (सर्वाइकल) और कमर (लम्बर) में लगातार दर्द बना रहता है। खासकर लंबे समय तक गलत तरीके से बैठने और खड़े होने की आदत से यह समस्या बढ़ सकती है। इसके अलावा, ऑस्टियोपोरोसिस जैसे रोग भी रीढ़ की हड्डी के दर्द का कारण बन सकते हैं। जब हड्डियां कमजोर हो जाती हैं, तो रीढ़ में दर्द होना शुरू हो सकता है।

चोट या नसों की समस्याएं

कभी-कभी रीढ़ की हड्डी में दर्द पुरानी चोट, सूजन, या नसों से जुड़ी समस्याओं के कारण भी हो सकता है। इन कारणों से नसों पर दबाव पड़ता है और दर्द की स्थिति पैदा होती है।

स्लिप डिस्क: क्यों यह एक गंभीर समस्या बन सकती है?

स्लिप डिस्क का खतरा 30 से 50 साल के लोगों में अधिक देखा जाता है। उम्र बढ़ने के साथ, रीढ़ की डिस्क का लचीलापन कम हो जाता है, जिससे दर्द की समस्या बढ़ सकती है। इसके अलावा, कुछ और सामान्य कारण जैसे गलत तरीके से झुकना, भारी वजन उठाना, मोटापा, और अचानक गिरना भी स्लिप डिस्क की वजह बन सकते हैं। अगर इसे समय रहते ठीक न किया जाए, तो नसों पर दबाव बढ़ सकता है और गंभीर स्थितियां जैसे सुन्नपन, कमजोरी, और यहां तक कि पैरालिसिस भी हो सकती है।

इन लक्षणों को न करें नज़रअंदाज

अगर रीढ़ की हड्डी में दर्द के साथ निम्नलिखित लक्षण दिखें, तो इसे हल्के में न लें और तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें:

हाथ-पैरों में झनझनाहट या सुन्नपन।

मांसपेशियों में कमजोरी।

उठने-लटकने या झुकने में परेशानी।

लंबे समय तक बैठने में दर्द का अनुभव होना।

चलने में संतुलन का बिगड़ना।

इन लक्षणों को नजरअंदाज करने की बजाय, विशेषज्ञ से सही सलाह लेना बहुत जरूरी है।

रीढ़ की हड्डी को स्वस्थ रखने के उपाय

अब सवाल यह उठता है कि हम अपनी रीढ़ को कैसे स्वस्थ रख सकते हैं। इसके लिए आपको कुछ साधारण आदतों को अपनी दिनचर्या में शामिल करना होगा:

हमेशा सही पोस्चर में बैठें और खड़े हों।

ज्यादा देर तक एक ही जगह न बैठें। समय-समय पर खड़े होकर स्ट्रेचिंग करें।

हल्की एक्सरसाइज, योग और नियमित वॉक करें।

भारी वजन उठाने से बचें।

अपने वजन को नियंत्रित रखें।

सोने के लिए सही और आरामदायक गद्दे का इस्तेमाल करें।