Up kiran,Digital Desk : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को आगरा में पार्टी के सांसदों, विधायकों और पदाधिकारियों की जमकर क्लास ली. मौका था वोटर लिस्ट को अपडेट करने के लिए चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान की समीक्षा का, लेकिन सीएम का अंदाज बिल्कुल दो-टूक था. उन्होंने साफ संदेश दिया कि यह सिर्फ एक सरकारी काम नहीं, बल्कि चुनाव जीतने की पहली और सबसे बड़ी सीढ़ी है.
सीएम ने एक 'मास्टर-मंत्र' देते हुए कहा, "अगर चुनाव जीतना है तो याद रखो: योग्य छूटे नहीं, अयोग्य का नाम जुड़े नहीं." उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि अगले तीन दिन के लिए सभी नेता दावतें और दूसरे कार्यक्रम भूलकर सिर्फ और सिर्फ इसी काम में जी-जान से जुट जाएं.
शहरी सीटों पर ढीले काम से नाराज दिखे सीएम
मंडलायुक्त सभागार में हुई इस बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खास तौर पर शहरी इलाकों में धीमी गति से चल रहे काम को लेकर नाराज दिखे. उन्होंने आगरा, मथुरा-वृंदावन, फिरोजाबाद और मैनपुरी जैसे शहरों का जिक्र करते हुए कहा कि इन जगहों पर एक लाख से ज्यादा वोटरों तक अभी तक पहुंचा ही नहीं गया है. उन्होंने शहरी विधायकों और पार्टी पदाधिकारियों को फटकार लगाते हुए कहा कि वे तुरंत मेयर, पार्षदों और बूथ कमेटियों को साथ लेकर घर-घर सत्यापन का काम पूरा करें.
विपक्ष से सीखने की दी नसीहत
सीएम योगी ने विपक्ष का उदाहरण देकर अपनी ही पार्टी के नेताओं को आईना दिखाया. उन्होंने मुरादाबाद की कुंदरकी, शामली की कैराना और नजीबाबाद जैसी सीटों का नाम लेते हुए कहा, "इनमें से कई सीटें आज विपक्ष के पास हैं, लेकिन वहां वोटर लिस्ट अपडेट करने का काम लगभग 100% पूरा हो चुका है. जब वो इतना काम कर सकते हैं, तो हम क्यों नहीं? इस बात को गंभीरता से लो और अपना एक-एक वोट ढूंढकर उसे लिस्ट में शामिल कराओ."
हार को जीत में बदलने की बताई तरकीब
मुख्यमंत्री ने मैनपुरी की करहल सीट से चुनाव लड़े अनुजेश प्रताप सिंह यादव का नाम लेकर एक सीधा उदाहरण दिया. उन्होंने कहा कि अगर आपने सत्यापन में मेहनत करके अपने असली वोटरों के नाम लिस्ट में जुड़वा लिए होते, तो जो हार थोड़े से वोटों से हुई थी, वो आज जीत में बदल सकती थी.
उन्होंने हर विधायक से एक-एक करके बात की और निर्देश दिया कि वे खुद बूथ समितियों के साथ கள में उतरें और हर एक नाम की जांच करें. सीएम ने कहा कि जिन भी नामों पर शक हो, उनकी बारीकी से जांच की जाए और अपात्रों को सूची से बाहर किया जाए.
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