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Up Kiran,Digital Desk: भारत अपनी मिसाइल शक्ति को एक नई दिशा देने के लिए तैयार है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने अपनी नई लॉन्ग रेंज एंटी-शिप मिसाइल (LRAShM) पर काम को तेज कर दिया है, जो वर्तमान में ब्रह्मोस से भी कहीं अधिक शक्तिशाली साबित हो सकती है। DRDO के प्रमुख डॉ. समीर वी. कामत के मुताबिक, यह मिसाइल भविष्य में भारतीय सेना, नौसेना और वायु सेना की प्रमुख जरूरतों को पूरा करेगी।

LRAShM की ताकत: ब्रह्मोस से कहीं आगे

लंबी रेंज और तेज गति के कारण LRAShM को युद्धक्षेत्र में एक निर्णायक भूमिका निभाने के लिए तैयार किया जा रहा है। इसकी गति और मारक क्षमता दुश्मन को प्रतिक्रिया देने का बहुत कम समय देंगी। यही कारण है कि यह मिसाइल आधुनिक युद्धों के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव साबित हो सकती है। आधुनिक युद्ध में वही हथियार सबसे प्रभावी होता है, जो तेज और दूर तक मार कर सकता है। इस दृष्टिकोण से LRAShM ब्रह्मोस की तुलना में अधिक प्रभावी मानी जा रही है।

यह सिर्फ नौसेना तक सीमित नहीं रहेगा

प्रारंभ में इसे सिर्फ नौसेना की जरूरतों के लिए डिजाइन किया गया था, लेकिन अब यह तकनीकी रूप से सभी तीनों सेनाओं के लिए महत्वपूर्ण बन सकता है। भारतीय सेना ने भी इसकी आवश्यकता को पहचाना है और इसके भूमि-आधारित संस्करण पर भी काम शुरू कर दिया है। उद्देश्य साफ है—एक ऐसी मिसाइल प्रणाली तैयार करना जो समुद्र और भूमि दोनों पर सटीक हमले कर सके।

दुश्मन की रक्षा प्रणालियों को भेदने की क्षमता

LRAShM के प्रमुख लाभ में से एक उसकी लंबी रेंज और तेज गति है, जो इसे दुश्मन की एयर डिफेंस और मिसाइल डिफेंस प्रणालियों के लिए गंभीर चुनौती बनाती है। समुद्र में यह दुश्मन के युद्धपोतों और तटीय ठिकानों को सुरक्षित दूरी से निशाना बना सकती है। इसके कारण यह मिसाइल भविष्य के संघर्षों में अत्यधिक महत्वपूर्ण हो सकती है।

DRDO इस नई मिसाइल परियोजना को "मिसाइल परिवार" के रूप में विकसित कर रहा है। इसके पहले चरण में एंटी-शिप वर्जन तैयार किया जाएगा, जबकि दूसरे चरण में भूमि पर हमला करने वाला संस्करण और भविष्य में एयर-लॉन्च वर्जन की योजना बनाई गई है। हालांकि फाइटर जेट से इतनी तेज़ गति वाली मिसाइल को लॉन्च करना तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण है, इसलिए फिलहाल समुद्र और जमीन से लॉन्च किए जाने वाले संस्करणों पर अधिक ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।