
Up Kiran, Digital Desk: टाइप-2 डायबिटीज, यानी शुगर की बीमारी, आज भारत के हर घर में एक आम समस्या बन गई है। एक बार किसी को यह बीमारी हो जाए, तो उसे यही लगता है कि अब ज़िंदगी भर दवाइयों के सहारे ही रहना पड़ेगा। लेकिन क्या यह सच है? क्या टाइप-2 डायबिटीज को सच में जड़ से ख़त्म किया जा सकता है, या यह सिर्फ़ एक अधूरी उम्मीद है? इस सवाल का जवाब अब देश के एक बड़े एंडोक्रिनोलॉजिस्ट (हार्मोन विशेषज्ञ) ने दिया है, और उनका जवाब लाखों लोगों की ज़िंदगी बदल सकता है।
डॉक्टर का कहना है कि हाँ, टाइप-2 डायबिटीज को "रिवर्स" करना, यानी उसके प्रभाव को पूरी तरह से पलटना संभव है। इसका मतलब यह है कि मरीज़ एक ऐसी स्टेज पर पहुँच सकता है, जहाँ उसे अपना ब्लड शुगर कंट्रोल करने के लिए किसी भी दवाई की ज़रूरत न पड़े। लेकिन यह हर किसी के लिए संभव नहीं है और इसके लिए कुछ सख़्त नियमों का पालन करना पड़ता है।
क्या है डायबिटीज का 'रिवर्स' होना?
डायबिटीज रिवर्सल का मतलब यह नहीं है कि आपकी बीमारी हमेशा के लिए जड़ से ख़त्म हो गई है। इसका मतलब है कि आप अपनी जीवनशैली में इतने अच्छे बदलाव ले आए हैं कि आपका ब्लड शुगर बिना दवाइयों के भी सामान्य स्तर पर बना हुआ है। इसे मेडिकल भाषा में "Remission" यानी 'छूट' कहा जाता है। अगर आप वापस अपनी पुरानी, ख़राब आदतों पर लौट जाते हैं, तो डायबिटीज भी वापस आ सकती है।
कौन कर सकता है अपनी डायबिटीज को रिवर्स?
डॉक्टर के अनुसार, हर मरीज़ अपनी डायबिटीज को रिवर्स नहीं कर सकता। यह उन लोगों के लिए ज़्यादा संभव है:
जिन्हें हाल ही में, यानी पिछले 5-6 सालों के अंदर ही टाइप-2 डायबिटीज का पता चला हो।
जिनका वज़न बहुत ज़्यादा हो (जो मोटापे से ग्रस्त हों)।
जो अपनी बीमारी को लेकर गंभीर हों और सख़्त डाइट और एक्सरसाइज का पालन करने के लिए तैयार हों।
अगर किसी को 10-15 साल से डायबिटीज है और वह इंसुलिन पर निर्भर है, तो उसके लिए इसे रिवर्स करना लगभग नामुमकिन होता है।
कैसे होती है डायबिटीज रिवर्स
वज़न कम करना: एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर आप अपने शरीर का 10 से 15 किलो वज़न कम कर लेते हैं, तो डायबिटीज के रिवर्स होने की संभावना बहुत ज़्यादा बढ़ जाती है। वज़न कम होने से शरीर में इंसुलिन बेहतर तरीक़े से काम करने लगता है।
लो-कैलोरी डाइट: इसके लिए मरीज़ को बहुत ही कम कैलोरी वाली डाइट (Very Low-Calorie Diet) पर रखा जाता है, जिसमें दिन भर में सिर्फ़ 800-1000 कैलोरी ही ली जाती है। यह सिर्फ़ एक डॉक्टर या डाइटिशियन की देखरेख में ही किया जाना चाहिए।
नियमित एक्सरसाइज: हफ़्ते में कम से कम 150 मिनट की तेज़ कसरत, जैसे ब्रिस्क वॉकिंग, जॉगिंग या साइकलिंग, बहुत ज़रूरी है।
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