Up kiran,Digital Desk : लोकसभा की कार्यवाही के दौरान बुधवार को एक ऐसा दुर्लभ और भावुक दृश्य देखने को मिला, जिसे भारतीय संसदीय इतिहास में लंबे समय तक याद रखा जाएगा। अमूमन सदन को अनुशासित करने वाले और दूसरों को बोलने की अनुमति देने वाले 'आसन' (Chair) से जब खुद एक सवाल गूंजा, तो सत्ता पक्ष से लेकर विपक्ष तक हर कोई इस अनूठे पल का साक्षी बन गया। तेलुगु देशम पार्टी (TDP) के वरिष्ठ नेता कृष्ण प्रसाद तेनेती ने पद की गरिमा और जनहित की जिज्ञासा के बीच एक ऐसा संतुलन बनाया, जिसने सदन का दिल जीत लिया।
जब 'आसन' ही बन गया 'सवाल'
वाकया प्रश्नकाल का है, जब सदन की कमान तेदेपा नेता कृष्ण प्रसाद तेनेती के हाथों में थी। संयोग ऐसा बना कि प्रश्नकाल की सूची में अगला प्रश्न स्वयं तेनेती का था, जो उन्होंने दुर्लभ मृदा खनिजों (Rare Earth Minerals) को लेकर पूछा था। संसदीय नियमों के अनुसार, पीठासीन अधिकारी प्रश्न नहीं पूछते, लेकिन तेनेती ने इस संवैधानिक प्रोटोकॉल और अपनी जिम्मेदारी के बीच रास्ता निकालते हुए सदन से विशेष अनुमति मांगी।
उन्होंने मुस्कुराते हुए केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह की ओर देखा और कहा:
"अगला प्रश्न मेरे नाम पर है। यदि आपकी अनुमति हो, तो क्या आप इसका उत्तर देंगे?"
विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन की चिंता
अपनी जिज्ञासा रखते हुए तेनेती ने एक गंभीर विषय की ओर सरकार का ध्यान खींचा। उन्होंने पूछा कि जब हमें तटीय क्षेत्रों (Coastal Areas) में दुर्लभ और मूल्यवान खनिज मिलते हैं, तो पर्यावरण की सुरक्षा और संसाधनों के दोहन के बीच सही संतुलन कैसे बनाया जाए? उनका यह प्रश्न केवल एक सांसद का नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति सजग एक नागरिक की चिंता का स्वर था।
सरकार का जवाब: सुरक्षा और तस्करी पर कड़ा रुख
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने इस दुर्लभ क्षण का सम्मान करते हुए विस्तार से उत्तर दिया। उन्होंने सदन को बताया कि बीच सैंड मिनरल्स (Beach Sand Minerals) दो मुख्य स्रोतों—तटीय निक्षेपों और चट्टानों—से प्राप्त होते हैं।
मंत्री ने पिछली चुनौतियों का जिक्र करते हुए एक बड़ी जानकारी साझा की:
तस्करी पर लगाम: 2014-15 के दौरान ग्रेफाइट की आड़ में मोनाजाइट (जो थोरियम का मुख्य स्रोत है) की तस्करी एक बड़ी राष्ट्रीय सुरक्षा समस्या बन गई थी।
कड़े कदम: सरकार ने इसे रोकने के लिए कड़े नियम बनाए और कुछ समय के लिए प्रतिबंध भी लगाया ताकि देश की खनिज संपदा सुरक्षित रहे।
क्यों खास है यह घटना?
सदन में हुई यह संक्षिप्त चर्चा इस बात का प्रमाण है कि लोकतंत्र में पद की गरिमा और जनहित के सवाल एक साथ चल सकते हैं। जब पीठासीन अधिकारी ने नियम के दायरे में रहकर अपनी बात रखी, तो पूरा सदन इस ऐतिहासिक और सकारात्मक पल का गवाह बना।




