img

rajasthan news: राजस्थान की सियासत में इन दिनों एक नाम गूंज रहा है-यूनुस खान। डीडवाना से निर्दलीय विधायक और कभी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कद्दावर नेता रहे खान आजकल सुर्खियों में हैं, मगर वजह कोई सियासी दांव-पेंच नहीं, बल्कि मंदिरों की बेहतरी और वैदिक शिक्षा को बढ़ावा देने की उनकी कोशिशें हैं। एक मुस्लिम विधायक का हिंदू धरोहर के लिए विधानसभा में बार-बार आवाज उठाना चर्चा का विषय बना हुआ है

31 जनवरी से शुरू हुए राजस्थान विधानसभा के बजट सत्र में यूनुस खान ने मंदिरों के संरक्षण और वैदिक शिक्षा को लेकर सात सवाल उठाए। इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, खान ने पुजारियों के लिए मानदेय में बढ़ोतरी, मंदिरों की देखरेख और वैदिक विद्यालयों के शिक्षकों व छात्रों को दी जाने वाली सहायता जैसे मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगा। ये कोई पहली बार नहीं है जब खान ने इन विषयों को उठाया हो।

उनकी ये मुहिम तब और खास हो जाती है, जब आप जानते हैं कि वह खुद रोजे रखते हुए वेदों की शिक्षा पर चर्चा करते हैं और विधायक पद की शपथ भी संस्कृत में ले चुके हैं।

यूनुस का कहना है कि उनकी कोशिशें रंग लाई हैं। हाल ही में मीडिया से बातचीत में उन्होंने दावा किया कि मैंने पुजारियों और वैदिक शिक्षकों के मानदेय का मुद्दा उठाया, जिसके बाद सरकार ने इसमें बढ़ोतरी की। ये मेरे लिए गर्व की बात है। उनकी ये बात न सिर्फ उनके आत्मविश्वास को दिखाती है, बल्कि एक संदेश भी देती है कि सही मंशा के साथ उठाया गया कदम समाज के हर वर्ग को जोड़ सकता है।

--Advertisement--