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Up kiran,Digital Desk : अमेरिका के सबसे सुरक्षित संस्थानों में काम करने वाले वैज्ञानिकों का अचानक गायब हो जाना या संदिग्ध परिस्थितियों में मिलना—यह किसी हॉलीवुड थ्रिलर फिल्म की पटकथा जैसा लग सकता है, लेकिन यह हकीकत है। साल 2023 से अब तक परमाणु हथियार और एयरोस्पेस टेक्नोलॉजी से जुड़े 9 से 10 शीर्ष वैज्ञानिकों की रहस्यमय गुमशुदगी ने अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की नींद उड़ा दी है। अब इस सनसनीखेज मामले पर पहली बार वाइट हाउस ने आधिकारिक बयान दिया है।

प्रेस ब्रीफिंग में उठा सवाल: क्या कह रही है सरकार?

बुधवार को वाइट हाउस की प्रेस ब्रीफिंग के दौरान दिग्गज पत्रकार पीटर डूसी ने प्रेस सचिव करोलाइन लेविट को इस मुद्दे पर घेरा। डूसी ने सीधे तौर पर अति-गोपनीय (Classified) प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहे वैज्ञानिकों की मौतों और उनके लापता होने के बारे में सवाल पूछा।

लेविट का जवाब: "मैंने इन रिपोर्ट्स को देखा है, लेकिन अभी संबंधित सुरक्षा एजेंसियों से इस बारे में विस्तृत चर्चा नहीं की है। मैं निश्चित रूप से उनसे बात करूंगी और आपको जवाब दिलाऊंगी। अगर ये रिपोर्ट्स सच हैं, तो इस प्रशासन के लिए इसकी जांच करना सर्वोच्च प्राथमिकता होगी।"

कहां से गायब हुए वैज्ञानिक? (हाई-सिक्योरिटी जोन)

लापता होने वाले वैज्ञानिक मामूली पदों पर नहीं थे। वे अमेरिका के उन संस्थानों से जुड़े थे जहाँ परिंदा भी पर नहीं मार सकता:

लॉस एलामोस नेशनल लेबोरेटरी: जहाँ परमाणु हथियारों का विकास होता है।

नासा जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी (JPL): उन्नत रॉकेट और स्पेस टेक्नोलॉजी का केंद्र।

MIT प्लाज्मा साइंस: अगली पीढ़ी की ऊर्जा प्रौद्योगिकियों पर अनुसंधान।

रहस्यमयी तरीके: बटुआ-चाबियाँ घर पर, वैज्ञानिक गायब!

जांचकर्ताओं को सबसे ज्यादा हैरान जिस बात ने किया है, वह है वैज्ञानिकों के गायब होने का तरीका। रिपोर्टों के अनुसार, कई वैज्ञानिक अपने घर से बिना किसी तैयारी के, पैदल ही निकले और अपना फोन, वॉलेट और चाबियां घर पर ही छोड़ गए।

मेजर जनरल की गुमशुदगी: इस कड़ी में सबसे ताजा और चौंकाने वाला नाम सेवानिवृत्त एयर फोर्स मेजर जनरल विलियम नील मैककैसलैंड का है। वे 27 फरवरी 2026 को अल्बुकर्क से गायब हुए थे। वे उन्नत एयरोस्पेस रिसर्च के विशेषज्ञ माने जाते थे।

क्या यह जासूसी या टार्गेटेड किलिंग है?

पूर्व FBI अधिकारियों और विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में संवेदनशील वैज्ञानिकों का गायब होना महज इत्तेफाक नहीं हो सकता। इसके पीछे तीन बड़ी आशंकाएं जताई जा रही हैं:

विदेशी जासूसी: किसी दुश्मन देश द्वारा डेटा चोरी या अपहरण।

टार्गेटेड एलिमिनेशन: अमेरिका की तकनीकी बढ़त को रोकने के लिए वैज्ञानिकों को निशाना बनाना।

सिस्टम की विफलता: क्या इन वैज्ञानिकों पर किसी अज्ञात प्रोजेक्ट का दबाव था?

सोशल मीडिया पर अमेरिकी नागरिक सवाल उठा रहे हैं कि क्या संघीय एजेंसियां (जैसे FBI या CIA) इन मामलों को सुलझाने की कोशिश कर रही हैं या इन्हें किसी बड़े 'कवर-अप' के तहत दबाया जा रहा है।