Up kiran,Digital Desk : अमेरिकी नौसेना का सबसे आधुनिक और शक्तिशाली विमानवाहक पोत (Aircraft Carrier) यूएसएस गेराल्ड आर. फोर्ड (USS Gerald R. Ford) जल्द ही मिडिल ईस्ट और अरब सागर के मिशन को छोड़कर वापस वर्जीनिया लौटने वाला है। लगातार 309 दिनों की ऐतिहासिक तैनाती के बाद इसे वापस बुलाने का फैसला लिया गया है। इस खबर के बाद यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या अमेरिका ईरान के खिलाफ अपनी 'नाकेबंदी' (Blockade) को कमजोर कर रहा है।
क्यों वापस बुलाया जा रहा है 'समुद्र का सिकंदर'?
USS गेराल्ड को वापस बुलाने के पीछे कोई कूटनीतिक नरमी नहीं, बल्कि तकनीकी और मानवीय मजबूरियां हैं:
रिकॉर्ड तैनाती का दबाव: अमेरिकी नौसेना के नियमों के अनुसार, एक युद्धपोत को आमतौर पर 6-7 महीने के लिए तैनात किया जाता है। गेराल्ड पिछले 10 महीने (309 दिन) से समुद्र में है, जो एक नया रिकॉर्ड है। इतनी लंबी तैनाती से जहाज की मशीनरी और क्रू (सैनिकों) पर अत्यधिक दबाव पड़ गया है।
तकनीकी खराबी और हादसे: हाल ही में इस युद्धपोत के लॉन्ड्री रूम में आग लगने की घटना सामने आई थी, जिसमें कई जवान घायल हुए थे। लंबे समय तक मरम्मत न होने के कारण जहाज के सिस्टम में तकनीकी दिक्कतें आने लगी हैं।
मरम्मत की जरूरत: जहाज को वर्जीनिया के पोर्ट पर भेजकर इसकी गहन ओवरहॉलिंग और मेंटेनेंस की जाएगी, ताकि यह भविष्य के ऑपरेशनों के लिए तैयार रह सके।
क्या खत्म हो जाएगी होर्मुज की नाकेबंदी?
रक्षा विशेषज्ञों और अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, नाकेबंदी खत्म होने का कोई संकेत नहीं है। अमेरिका ने 'प्लान-बी' के तहत अपनी ताकत को बरकरार रखा है:
दो और महाविनाशक तैनात: USS गेराल्ड के जाने के बाद भी क्षेत्र में USS अब्राहम लिंकन और USS जॉर्ज बुश जैसे दो विशाल एयरक्राफ्ट कैरियर मौजूद हैं।
ट्रंप की रणनीति: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि नाकेबंदी 'बमबारी' से अधिक प्रभावी है। जब तक ईरान नई परमाणु शर्तों को नहीं मानता, तब तक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से ईरानी तेल का निर्यात बंद रहेगा।
बैकअप की तैयारी: गेराल्ड की जगह लेने के लिए अन्य युद्धपोत और स्ट्राइक ग्रुप पाइपलाइन में हैं।
रणनीतिक महत्व: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और तेल का खेल
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग है। यहाँ से दुनिया के कुल तेल उत्पादन का लगभग 20% गुजरता है। अमेरिकी नाकेबंदी के कारण:
कच्चा तेल: कीमतें 4 साल के उच्चतम स्तर (122 डॉलर प्रति बैरल के करीब) पर पहुंच गई हैं।
ईरान की हालत: ईरान के पास तेल स्टोर करने की जगह खत्म हो रही है, जिससे उसकी अर्थव्यवस्था 'कोलेप्स' होने की कगार पर है।
संसद में उठे सवाल: युद्ध की कीमत क्या है?
अमेरिकी संसद (कैपिटल हिल) में रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ से इस लंबी तैनाती को लेकर कड़े सवाल पूछे गए। सांसदों ने पूछा कि एक युद्धपोत को उसकी क्षमता से अधिक समय तक समुद्र में रखने से नौसेना के बजट और जवानों के मानसिक स्वास्थ्य पर क्या असर पड़ रहा है। अधिकारियों ने स्वीकार किया कि यह फैसला चुनौतीपूर्ण था, लेकिन ईरान के खिलाफ दबाव बनाए रखने के लिए जरूरी था।




