पवन सिंह
किस बात का प्रेस दिवस। भारतीय मीडिया के डागी बन जाने का दिवस? भारतीय मीडिया की जीभ को सिल दिए जाने का दिवस? भारतीय मीडिया की कब्र पर फातिया पढ़ने का दिवस...? जनसरोकारी सवालों से दूर हो चुके बेगैरत भारतीय मीडिया की पतुरिया नृत्य का दिवस..???....आजादी के बाद जो गरिमा और विश्वास की पूंजी भारतीय मीडिया ने कमाई थी उसके धूलधूसरित हो जाने का प्रेस दिवस..????...कहां हैं वो सैकड़ों सवाल जिसे मीडिया सिरे से चबा गया..!!!!!
अंबानी की एक फाइल क्लीयर करने के लिए राम माधव ने मुझे 300 करोड़ का आफर दिया था-यह सवाल सत्यपाल मलिक ने उठाया था...बडी खबर थी लेकिन मीडिया इसे खा गया। अडानी पर सेबी और सरकार की ख़ामोशी और अडानी और चीनी उद्योगपति के कनेक्शन, अडानी और मारीशस कनेक्शन पर मीडिया मौत सी खामोशी ओढ़े रहा। अडानी के पोर्ट पर चीनी इंजीनियरों की सक्रियता और नौसेना के संदेह... मीडिया खामोश है। भारतीय बैंकों द्वारा आम आदमी की जेब से 40 तरह की अघोषित कटौतियां व बढ़ती ट्रेन दुर्घटनाओं पर खामोशी क्यों? इजरायल पर कूकुर की तरह रिपोर्टिंग और मणिपुर पर मीडिया की मौन मौत क्यों? 31 से अधिक गुजरातियों द्वारा देश की बैंकों का अरबों-खरबों लेकर देश से आराम से निकल जाना और मीडिया की ख़ामोशी क्यों?नौकरियों से बड़ी खूबसूरती से ओबीसी का कोटा गैस सब्सिडी की तरह साफ सुदामा कोटा की बल्ले बल्ले और मीडिया चुप?
आम आदमी नमक और बच्चे कापी-पेंसिल पर भी जीएसटी दें और अडानी का जयपुर एअर पोर्ट खरीद पर हजार करोड़ से अधिक का जीएसटी माफ? अडानी ग्रुप ने अक्टूबर 2021 में एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) से जयपुर एयरपोर्ट के संचालन और प्रबंधन का काम अपने हाथ में ले लिया था. इसी पर AAI ने अथॉरिटी ऑफ एडवांस रूलिंग ने (AAR) से पूछा था कि इस डील पर जीएसटी लागू होगा या नहीं. अथॉरिटी ऑफ एडवांस रूलिंग एक इंडिपेंडेंट बॉडी होती है जो टैक्स के मामलों में फैसला देती है. जैसे किसी विवाद के निपटारे के लिए ट्राइब्यूनल का गठन होता है। समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, इसी पर 20 मार्च 2023 को अथॉरिटी ऑफ एडवांस रूलिंग ने फैसला दिया. AAR ने कहा कि एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया और अडानी ग्रुप के बीच जो डील हुई, वो गोइंग कन्सर्न (Going concern) के तहत है. इस तरह के बिजनेस ट्रांसफर जीएसटी कानून के तहत सर्विस के तहत आते हैं लेकिन यह जीएसटी के दायरे से बाहर होते हैं। अब ये गोइंग कन्सर्न क्या है?
इसे समझने के लिए हमने बात की वित्तीय मामलों के जानकार शरद कोहली से. उनके मुताबिक, गोइंग कन्सर्न का मतलब होता है किसी चलते हुए बिजनेस को पूरी तरह दूसरे व्यक्ति के हाथों सौंप देना. जैसे अगर कोई दुकान चल रही है और आपने किसी को बेच दी तो उस डील पर जीएसटी लागू नहीं होगा. वहीं अगर दुकान बंद होती और आपने सामान बेच दिया या पूरी दुकान ही बेच देते हैं तो फिर उस पर जीएसटी लागू होगा. चलते हुए बिजनेस को बेचने को सप्लाई नहीं माना जाता है. इसलिए अडानी ग्रुप को एयरपोर्ट सौंपे जाने पर इस टर्म का इस्तेमाल किया गया..???!!!... लेकिन चुप्पी क्यों?
विज्ञापन और धर्म के नाम पर अरबों लुटाए गये मीडिया खामोश क्यों? अखबारी कागज पर जीएसटी लगाकर छोटे व मझौले समाचार पत्र-पत्रिकाओं को खत्म कर दिया गया...साजिश पर चुप्पी क्यों? पुलवामा पर मीडिया खामोश क्यों? नोटबंदी पर मीडिया की खामोशी क्यों? गलवान घाटी से लेकर अरूणाचल प्रदेश में चीनी खेल पर तथाकथित राष्ट्रवादी मीडिया चुप क्यों? रूपए की ऐतिहासिक तबाही, बेरोजगारी, बढ़ती आत्महत्याओं, नौकरियों की तबाही पर मीडिया के सवाल क्यों नहीं? पीएम केयर फंड पर मौत सी मीडियाई खामोशी क्यों? पेट्रोल, गैस, और डीजल पर अंधी वसूली लेकिन मीडिया चुप क्यों?
देश के मेन स्ट्रीम मीडिया ने अपने ही देश में वह सब कर दिया जो चीन और पाकिस्तान करना चाहते थे...। आवाम के भीतर नफरत का एक घिनौना खेल भारतीय मीडिया ने खेला और धर्म व जाति के नाम पर पूरे भारतीय समाज की समरसता को समाप्त कर दिया...जिन आर्थिक और सामरिक विषयों पर भारतीय मीडिया को मुखर होना था वह उसे चबा गया। लाखों-लाख कर्मचारी दिल्ली में पुरानी पेंशन की मांग को लेकर जुटे लेकिन मीडिया ने खबर को पूरी तरह से गायब कर दिया?....सेना को साजिशन तबाह किया जा रहा है मीडिया खामोश है। अग्निवीर भर्ती पर व्यापक बहस होनी चाहिए थी मीडिया बहस से भाग गया? नेपाल ने भारतीय सेना के लिए गोरखाओं की भर्ती प्रक्रिया रोक दी और चीन अब गोरखाओं की अलग बटालियन पर काम कर रहा है.... भारतीय सेना के लिए ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय संप्रभुता के लिए यह एक बड़ा खतरा है लेकिन मीडिया खामोश है..?
ऐसे हजारों सवाल हैं जिन पर मीडिया पूरी तरह से खामोश है... मीडिया का खुला रिश्ता अब सीधे सत्ता से है जनता से नहीं...अब आप न्यूज चैनल नहीं देखते झूठ व फरेब का प्रोपेगैंडा देखते हैं और अखबार नहीं पढ़ते हैं बल्कि सत्ता का मुखपत्र पढ़ते हैं...
सवाल - कौन सा प्रेस दिवस!!??




