Up kiran,Digital Desk : बिहार की राजनीति में बड़ा उलटफेर करने के बाद अब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपनी पार्टी, जनता दल यूनाइटेड (JDU) के संगठन को नया रूप दे दिया है। बुधवार को जारी की गई 24 राष्ट्रीय पदाधिकारियों की नई सूची में कई पुराने चेहरों पर भरोसा जताया गया है, तो वहीं कुछ बदलाव भी किए गए हैं। हालांकि, सबसे ज्यादा चर्चा नीतीश के बेटे निशांत कुमार की है, जिनका नाम इस लिस्ट से नदारद है।
संजय झा बने रहेंगे कार्यकारी अध्यक्ष, चंद्रवंशी को बड़ी जिम्मेदारी
पार्टी द्वारा जारी सूची के अनुसार, राज्यसभा सांसद संजय झा जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष के पद पर बने रहेंगे। वह नीतीश कुमार के बेहद भरोसेमंद माने जाते हैं। वहीं, जहानाबाद के पूर्व सांसद चंद्रेश्वर प्रसाद चंद्रवंशी को पार्टी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। आलोक कुमार सुमन को कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
महासचिवों की फौज: अशोक चौधरी और श्याम रजक को मिली जगह
नीतीश कुमार ने 12 नेताओं को राष्ट्रीय महासचिव बनाकर संगठन को मजबूती देने की कोशिश की है। इस सूची में प्रमुख नाम इस प्रकार हैं:
मनीष कुमार वर्मा
अशोक चौधरी
श्याम रजक
आफाक अहमद खान
रमेश सिंह कुशवाहा
कहकशां परवीन
मौलाना गुलाम रसूल बलियावी
इसके अलावा राजीव रंजन सिंह को राष्ट्रीय प्रवक्ता के पद पर बरकरार रखा गया है, जबकि 7 नेताओं को राष्ट्रीय सचिव की जिम्मेदारी दी गई है।
निशांत कुमार का नाम क्यों नहीं? सियासी गलियारों में सुगबुगाहट
नीतीश कुमार के राजनीति से दूरी बनाने की चर्चाओं के बीच उनके बेटे निशांत कुमार ने हाल ही में जेडीयू की सदस्यता ली थी। कयास लगाए जा रहे थे कि उन्हें संगठन में कोई बड़ा पद मिलेगा, लेकिन इस सूची में उनका नाम न होना सबको चौंका रहा है।
जानकारों का मानना है कि निशांत फिलहाल सरकार या संगठन के बड़े पदों के बजाय जमीन पर काम करना चाहते हैं। हाल ही में उन्होंने खुद कहा था कि वह अभी संगठन को मजबूत करेंगे और जनता के बीच जाएंगे। शायद यही वजह है कि उन्हें फिलहाल किसी औपचारिक पद से दूर रखा गया है।
3 मई से 'निशांत की यात्रा': चंपारण से भरेंगे हुंकार
भले ही निशांत कुमार को पदाधिकारी नहीं बनाया गया हो, लेकिन वह सक्रिय राजनीति में पूरी तरह उतर चुके हैं। 3 मई से वह बिहार यात्रा पर निकलने वाले हैं। अपने पिता नीतीश कुमार की तरह वह भी पश्चिम चंपारण से इस यात्रा का आगाज करेंगे। इस यात्रा के जरिए वह बिहार के सभी 38 जिलों में जाकर कार्यकर्ताओं और जनता से सीधा संवाद करेंगे। माना जा रहा है कि इस अनुभव के बाद ही उन्हें भविष्य में कोई बड़ी जिम्मेदारी दी जाएगी।




