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Up kiran,Digital Desk : बिहार की सियासत में आए बड़े बदलाव के बाद अब नई एनडीए सरकार पूरी तरह से 'नीतीश मॉडल' पर चलने को तैयार है। फ्लोर टेस्ट से ठीक पहले उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने बड़ा बयान देते हुए स्पष्ट किया है कि भले ही मुख्यमंत्री का चेहरा बदला है, लेकिन शासन का रास्ता और नीतियां नीतीश कुमार वाली ही रहेंगी। गुरुवार को जदयू कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में विजय चौधरी ने नई सरकार की दिशा और दशा को लेकर कई महत्वपूर्ण बातें कहीं।

नीतीश कुमार का आशीर्वाद और सम्राट का नेतृत्व

विजय चौधरी ने कहा कि सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी नीतीश कुमार के आशीर्वाद से ही मिली है। उन्होंने बताया:

बीजेपी की सहमति: भारतीय जनता पार्टी ने भी नीतीश कुमार के मार्गदर्शन को स्वीकार करते हुए सम्राट चौधरी का नाम आगे किया।

लोकप्रिय नीतियां: नीतीश कुमार पिछले 20 वर्षों से बिहार के सबसे पसंदीदा नेता रहे हैं। उनके द्वारा बनाई गई विकास की योजनाएं फलदायी साबित हुई हैं, इसलिए नई सरकार उन्हीं नीतियों को आधार मानकर आगे बढ़ेगी।

24 अप्रैल को फ्लोर टेस्ट: 'प्रचंड बहुमत' का दावा

बिहार विधानसभा का विशेष सत्र 24 अप्रैल को बुलाया गया है, जहां सम्राट चौधरी सरकार को अपना बहुमत साबित करना होगा। विजय चौधरी ने आत्मविश्वास के साथ कहा:

मजबूत बहुमत: एनडीए के पास साधारण नहीं, बल्कि 'प्रचंड और मजबूत' बहुमत है।

नीतीश का मार्ग: सरकार नई जरूर है, लेकिन यह नीतीश कुमार के बनाए 'लीक' पर ही चलेगी। जनता ने जिस भरोसे के साथ एनडीए को वोट दिया था, उन उम्मीदों को हर हाल में पूरा किया जाएगा।

राज्यसभा जाने का फैसला और नई सरकार का गठन

विजय चौधरी ने स्पष्ट किया कि नीतीश कुमार ने राज्यसभा जाने का फैसला स्वयं लिया था, जिसके बाद नई सरकार का गठन एक स्वाभाविक प्रक्रिया थी। उन्होंने जोर देकर कहा कि सम्राट चौधरी भी सार्वजनिक रूप से इस बात को स्वीकार करते हैं कि सरकार के संचालन का आधार नीतीश कुमार की सोच और उनके द्वारा शुरू किए गए कार्यक्रम ही रहेंगे।

निशांत कुमार की राजनीतिक सक्रियता पर चर्चा

प्रेस वार्ता के दौरान नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार को लेकर भी चर्चा हुई। हालांकि, राज्यसभा की नई टीम और राष्ट्रीय कार्यकारिणी में उन्हें फिलहाल जगह नहीं मिली है, लेकिन उनकी 'बिहार यात्रा' की खबरों ने सियासी हलकों में हलचल बढ़ा दी है। बताया जा रहा है कि निशांत चंपारण से अपनी यात्रा का आगाज कर सकते हैं, ठीक वैसे ही जैसे उनके पिता ने अपने राजनीतिक सफर में किया था।