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UP Kiran,Digital Desk: इजरायल और फिलिस्तीन के बीच जारी संघर्ष के बीच, इजरायली कैबिनेट ने एक ऐतिहासिक लेकिन विवादित निर्णय लिया है। यह फैसला वेस्ट बैंक के एरिया सी में भूमि पंजीकरण और स्वामित्व को लेकर किया गया है, जो 1967 के छह-दिवसीय युद्ध के बाद से रुका हुआ था। अब, इजरायल ने इस प्रक्रिया को फिर से शुरू करने का निर्णय लिया है, जिसके तहत यदि फिलिस्तीनी भूमि मालिक अपने स्वामित्व को साबित करने वाले दस्तावेज पेश नहीं कर पाते, तो उन जमीनों को 'राज्य संपत्ति' के रूप में कब्जा किया जा सकता है। इस प्रस्ताव को लेकर विवाद पैदा हो गया है और इसे विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संगठनों और देशों द्वारा तीव्र आलोचना का सामना करना पड़ा है।

भूमि स्वामित्व की प्रक्रिया को फिर से लागू करना

वेस्ट बैंक में भूमि स्वामित्व को लेकर जो प्रक्रिया 1967 के युद्ध के बाद ठप पड़ी थी, अब उसे फिर से शुरू किया जा रहा है। इस प्रक्रिया के तहत, किसी भी व्यक्ति को अपने स्वामित्व को साबित करने के लिए जरूरी दस्तावेज पेश करने होंगे। यदि फिलिस्तीनी भूमि मालिक इन दस्तावेजों को पेश करने में असफल रहते हैं, तो इजरायल को उस भूमि को राज्य संपत्ति के रूप में अपने अधीन लेने का अधिकार मिल जाएगा।

इस प्रस्ताव का मुख्य लक्ष्य वेस्ट बैंक के एरिया सी में भूमि स्वामित्व के मुद्दे को हल करना है, जो फिलहाल पूरी तरह से इजरायली सेना के नियंत्रण में है। इस क्षेत्र में बहुत सी फिलिस्तीनी भूमि युद्ध या कब्जे के दौरान दस्तावेजों के खो जाने या कानूनी प्रक्रिया की जटिलताओं के कारण कभी पंजीकृत नहीं हो पाई। अनुमान के अनुसार, इस क्षेत्र में लगभग तीन लाख से अधिक फिलिस्तीनी नागरिक रहते हैं और वे अपनी आजीविका के लिए इस भूमि पर निर्भर हैं।

बड़े पैमाने पर भूमि कब्जे का प्रयास

यह नया कदम इजरायल के दक्षिणपंथी मंत्रियों द्वारा पेश किया गया है, जिसमें वित्त मंत्री बेजलेल स्मोट्रिच और न्याय मंत्री यारिव लेविन के साथ रक्षा मंत्री इसराइल काट्ज़ भी शामिल हैं। स्मोट्रिच ने इसे 'बस्ती क्रांति' का हिस्सा बताया है, जिसका उद्देश्य इजरायल के नियंत्रण को वेस्ट बैंक के पूरे क्षेत्र में मजबूत करना है। उनके अनुसार, यह कदम इजरायल के राज्य के लिए एक ऐतिहासिक कदम है, लेकिन इसके प्रभावों के बारे में बहुत से विशेषज्ञ और आलोचक चिंतित हैं।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निंदा

फिलिस्तीन, मिस्र और कतर ने इस प्रस्ताव की तीव्र आलोचना की है। फिलिस्तीनी राष्ट्रपति कार्यालय ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन और क्षेत्रीय शांति के लिए एक गंभीर खतरा बताया है। इसके अलावा, इजरायल के बस्ती-विरोधी समूह 'पीस नाउ' ने इसे फिलिस्तीनियों से भूमि छीनने का एक बड़ा प्रयास करार दिया है। फिलिस्तीनी प्राधिकरण का कहना है कि यह कदम वेस्ट बैंक के 'वास्तविक विलय' की दिशा में एक और कदम है, जो क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए चिंताजनक है।