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Up kiran,Digital Desk : लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला है। केरल में एक चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने सनसनीखेज आरोप लगाया कि पीएम मोदी एक 'कंप्रोमाइज्ड' (दबाव में काम करने वाले) प्रधानमंत्री हैं। उन्होंने दावा किया कि भारत और अमेरिका के बीच हुए हालिया समझौतों ने देश की ऊर्जा सुरक्षा और संप्रभुता को खतरे में डाल दिया है।

अमेरिका-भारत समझौते पर उठाए गंभीर सवाल

राहुल गांधी ने जनसभा में कहा कि अगर कोई भी भारत-अमेरिका समझौते की बारीकियों को देखेगा, तो उसे साफ हो जाएगा कि कोई भी स्वाभिमानी प्रधानमंत्री ऐसे दस्तावेजों पर हस्ताक्षर नहीं कर सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने देश के कृषि क्षेत्र और ऊर्जा सुरक्षा की चाबी अमेरिकियों के हाथों में सौंप दी है। राहुल के मुताबिक, आज स्थिति यह है कि भारत अपनी जरूरत का तेल अपनी मर्जी से नहीं खरीद सकता, बल्कि उसे इसके लिए अनुमति लेनी पड़ती है।

केरल में भाजपा और LDF के 'सीक्रेट' गठबंधन का दावा

राहुल गांधी ने केरल की राजनीति में एक नया मोड़ लाते हुए आरोप लगाया कि राज्य में भाजपा और वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) के बीच गुप्त समझौता है। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी और अमित शाह जानते हैं कि वे भ्रष्टाचार के आरोपों के जरिए LDF सरकार को नियंत्रित कर सकते हैं, इसलिए वे केरल में कांग्रेस के नेतृत्व वाले UDF को सत्ता से बाहर रखना चाहते हैं। राहुल ने सवाल उठाया कि जब देशभर के विपक्षी नेताओं पर केंद्रीय एजेंसियां कार्रवाई कर रही हैं, तो केरल के मुख्यमंत्री पर कोई दबाव क्यों नहीं है?

'मुझसे 55 घंटे पूछताछ, लेकिन केरल सीएम पर चुप्पी क्यों?'

अपनी आपबीती सुनाते हुए राहुल गांधी ने कहा, "मेरे खिलाफ 36 मामले दर्ज किए गए और ईडी ने मुझसे 55 घंटे तक पूछताछ की। लेकिन केरल के एलडीएफ नेतृत्व के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती। यह साफ संकेत है कि भाजपा और माकपा मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं।" उन्होंने सबरीमाला मुद्दे पर पीएम मोदी की चुप्पी को भी इसी 'गठबंधन' का हिस्सा बताया और कहा कि 9 अप्रैल को होने वाले चुनाव में जनता इस साठगांठ को जवाब देगी।

देश की ऊर्जा और कृषि सुरक्षा को बताया खतरे में

विपक्ष के नेता ने चेतावनी दी कि केंद्र सरकार की नीतियों के कारण भारतीय किसान अब अमेरिकी बाजार की प्रतिस्पर्धा के सामने लाचार हो जाएंगे। उन्होंने ऊर्जा सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए कहा कि भारत जैसा विशाल देश अब अपनी रणनीतिक जरूरतों के लिए बाहरी ताकतों पर निर्भर होता जा रहा है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से एक बड़ी विफलता है।