Up Kiran, Digital Desk: भारत द्वारा पिछले साल मई में की गई ऑपरेशन सिंदूर, पाकिस्तान के लिए एक कड़ा संदेश लेकर आई। इस हमले ने न केवल पाकिस्तान के एयरबेसों को भारी नुकसान पहुँचाया, बल्कि यह भी साबित किया कि भारत किसी भी खतरे का जवाब देने में सक्षम है। एक साल बाद भी पाकिस्तान इन हमलों के बाद के असर से उबर नहीं पाया है।
पाकिस्तान की तबाही: एक साल बाद भी उबर नहीं पाए
हालांकि भारत के ऑपरेशन को सात महीने से अधिक समय हो चुका है, पाकिस्तान अभी तक अपने एयरबेसों के पुनर्निर्माण में व्यस्त है। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान के 11 एयरबेसों पर हुए हमलों से हुई तबाही को ठीक करने में उसे अभी भी समय लग रहा है। उपग्रह चित्रों और रक्षा विशेषज्ञों की रिपोर्ट्स में यह सामने आया है कि पाकिस्तान के अधिकतर एयरबेसों में मरम्मत का काम जारी है, लेकिन यह पूरी तरह से ठीक नहीं हो सके हैं।
पाकिस्तान के हवाई अड्डों की हालत
पाकिस्तान के एयरबेसों की स्थिति को लेकर आई रिपोर्ट्स के मुताबिक, नूर खान एयरबेस की मरम्मत में कई महीने लग गए हैं। पाकिस्तान ने खुद इस नुकसान को स्वीकार किया और कहा कि इस एयरबेस की तकनीकी मरम्मत की जा रही है। उपग्रह चित्रों से यह बात भी सामने आई कि भोलारी एयरबेस पर मरम्मत का काम हो रहा है और तिरपाल लगाकर क्षतिग्रस्त हैंगर को छिपाने की कोशिश की जा रही है।
मरम्मत की गति: पाकिस्तान की मुश्किलें
पाकिस्तान के कई एयरबेसों पर मरम्मत का काम तो जारी है, लेकिन पूरा सुधार होना अभी बाकी है। मुरीद, मुशफ, जैकोबाबाद और रफीकी जैसे प्रमुख एयरबेसों पर मरम्मत का कार्य चल रहा है, लेकिन ऑपरेशन सिंदूर के बाद इन एयरबेसों पर उड़ान संचालन में बड़ी दिक्कतें आई हैं। संरचनात्मक नुकसान के कारण रनवे और हैंगर प्रभावित हुए हैं, जिससे विमान संचालन में रुकावट आई। इसके अतिरिक्त, सियालकोट, स्कार्दू, सुक्कुर और चुनियां जैसे एयरबेस भी सुधार की स्थिति में हैं।
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