Up kiran,Digital Desk : महाराष्ट्र के शहरी इलाकों में हुए नगर निगम चुनावों के नतीजों ने सियासी समीकरण साफ कर दिए हैं। पुणे और पिंपरी-चिंचवाड़ में भारतीय जनता पार्टी ने एनसीपी और एनसीपी (शरद पवार गुट) को साफ तौर पर पीछे छोड़ दिया है। अजित पवार ने अपने चाचा और एनसीपी प्रमुख शरद पवार के गुट के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था, लेकिन यह गठबंधन उनके लिए कोई खास असर नहीं दिखा सका। अपने ही प्रभाव वाले इलाकों में उन्हें अपेक्षित समर्थन नहीं मिला।
चुनावी प्रचार के दौरान अजित पवार ने भाजपा पर तीखा हमला बोला था। उन्होंने आरोप लगाया था कि पिछले नौ वर्षों में दोनों नगर निगमों में विकास ठप रहा और भ्रष्टाचार बढ़ा। एनसीपी (शरद पवार गुट) के साथ मिलकर उन्होंने भाजपा को चुनौती देने की कोशिश की, लेकिन मतदाताओं ने अलग फैसला सुनाया।
रुझानों के अनुसार, पुणे नगर निगम में भाजपा 110 से अधिक सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। इसके मुकाबले एनसीपी केवल 12 सीटों पर आगे है, जबकि एनसीपी (शरद पवार गुट) महज दो सीटों तक सीमित नजर आ रहा है। पिंपरी-चिंचवाड़ में भी भाजपा की स्थिति मजबूत है, जहां वह 84 सीटों पर आगे चल रही है। यहां एनसीपी 37 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है।
एनसीपी ने मानी हार
पुणे शहर एनसीपी के कार्यकारी अध्यक्ष प्रदीप देशमुख ने नतीजों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अजित पवार ने चुनाव अभियान में पूरी ताकत झोंकी थी। पार्टी की ओर से मुफ्त मेट्रो और बस सेवाएं, 500 वर्ग फीट तक के मकानों पर प्रॉपर्टी टैक्स में छूट और बेहतर जल आपूर्ति जैसे वादे किए गए थे। इसके बावजूद जनता ने भाजपा के पक्ष में फैसला दिया। उन्होंने हार स्वीकार करते हुए कहा कि पार्टी जनादेश का सम्मान करती है।
दूसरी ओर, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और भाजपा नेताओं ने इन वादों को अव्यावहारिक बताते हुए एनसीपी पर निशाना साधा। चुनावी माहौल में मुंधवा जमीन घोटाले की चर्चा भी बनी रही। इस मामले में 40 एकड़ सरकारी जमीन को उसकी अनुमानित कीमत से काफी कम दाम पर एक निजी कंपनी को दिए जाने के आरोप लगे थे। जांच के दौरान स्टांप ड्यूटी में कथित छूट और अन्य अनियमितताओं को लेकर केस भी दर्ज किए गए, जिसका असर चुनावी माहौल पर दिखा।
ठाणे में भाजपा-शिवसेना गठबंधन मजबूत
ठाणे नगर निगम चुनाव में भी भाजपा-शिवसेना गठबंधन की स्थिति मजबूत नजर आ रही है। 131 सदस्यीय निगम में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के प्रभाव वाले इस क्षेत्र में शिवसेना 33 और भाजपा 17 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम ने भी यहां कुछ हद तक अपनी मौजूदगी दर्ज कराई और पांच सीटों पर जीत हासिल की।
एनसीपी (अजित पवार गुट) को सात सीटों पर सफलता मिली है, जबकि एनसीपी (शरद पवार गुट) आठ सीटों तक सिमट गई है। उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) केवल एक सीट जीत पाई, वहीं राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना का खाता तक नहीं खुल सका। आम आदमी पार्टी, वंचित बहुजन आघाड़ी और अन्य दल भी प्रभाव छोड़ने में नाकाम रहे। अब तक घोषित नतीजों में केवल एक निर्दलीय उम्मीदवार जीत दर्ज कर सका है, जबकि कई सीटों पर परिणाम आना बाकी है।
इन नतीजों ने साफ कर दिया है कि शहरी महाराष्ट्र में भाजपा और उसके सहयोगियों की पकड़ फिलहाल मजबूत बनी हुई है।




