Up kiran,Digital Desk : कर्ज के संकट और कानूनी लड़ाइयों से जूझ रहे अनिल अंबानी के लिए शेयर बाजार से राहत की खबर आई है। उनकी कंपनी रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर (Reliance Infrastructure) के शेयरों में पिछले 5 कारोबारी सत्रों से तूफानी तेजी देखने को मिल रही है। गुरुवार, 9 अप्रैल 2026 को कंपनी के शेयर BSE में 5% के अपर सर्किट के साथ 89.36 रुपये पर पहुंच गए। महज 5 दिनों के भीतर इस शेयर ने निवेशकों को 32% से ज्यादा का रिटर्न देकर चौंका दिया है।
निचले स्तर से शानदार रिकवरी
रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए पिछला कुछ समय काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। एक तरफ जहां पिछले कुछ सालों में यह शेयर अपने ऑल टाइम हाई से 99% से अधिक गिर चुका था, वहीं अब इसमें रिकवरी के संकेत मिल रहे हैं।
52 हफ्ते का लो: 1 अप्रैल 2026 को शेयर 64.25 रुपये के निचले स्तर पर था।
ताजा उछाल: निचले स्तर से अब तक शेयर 37% रिकवर हो चुका है।
मार्केट कैप: गुरुवार को कंपनी का कुल बाजार पूंजीकरण 3,651 करोड़ रुपये के पार पहुंच गया।
5 दिन का सफर: 67 रुपये से 89 रुपये तक
रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर के शेयरों में यह तेजी 2 अप्रैल से शुरू हुई थी।
2 अप्रैल 2026: शेयर का दाम 67.63 रुपये था।
9 अप्रैल 2026: शेयर 89.36 रुपये के स्तर पर बंद हुआ।
हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि शेयर का 52 हफ्ते का हाई लेवल 425 रुपये है, जिससे यह अब भी काफी नीचे ट्रेड कर रहा है।
इतिहास: ₹2600 से ₹9 तक का सफर
रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर का इतिहास निवेशकों के लिए किसी रोलरकोस्टर राइड से कम नहीं रहा है।
बुल रन (2008): 15 जनवरी 2008 को यह शेयर 2,641 रुपये के अपने शिखर पर था।
क्रैश (2020): कर्ज के बोझ और ग्रुप की समस्याओं के चलते 27 मार्च 2020 को शेयर 9.20 रुपये के ऐतिहासिक निचले स्तर पर आ गया था (लगभग 99.6% की गिरावट)।
कमबैक: उस निचले स्तर से शेयर ने एक समय 4300% की छलांग लगाई थी, लेकिन पिछले एक साल से यह फिर दबाव में है।
लंबी अवधि में अब भी गिरावट का दौर
भले ही पिछले 5 दिनों में शेयर भाग रहा हो, लेकिन लंबी अवधि के आंकड़े अब भी डराने वाले हैं:
पिछले 1 साल में गिरावट: 63% से अधिक।
पिछले 6 महीने में गिरावट: 61%।
2026 में अब तक (YTD): शेयर करीब 43% टूट चुका है।
शेयरहोल्डिंग पैटर्न
सितंबर 2025 के आंकड़ों के मुताबिक, कंपनी में प्रमोटर्स (अनिल अंबानी ग्रुप) की हिस्सेदारी महज 19.05% है, जबकि 80.84% हिस्सेदारी पब्लिक शेयरहोल्डर्स के पास है। प्रमोटर्स की कम हिस्सेदारी अक्सर निवेशकों के लिए चिंता का विषय होती है, लेकिन हालिया तेजी ने रिटेल इनवेस्टर्स की उम्मीदें फिर से जगा दी हैं।




