Up kiran,Digital Desk : महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और एनसीपी के वरिष्ठ नेता अजित पवार के असामयिक निधन के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। इस बीच उनके उत्तराधिकारी और नेतृत्व को लेकर उठी चर्चाओं पर शिवसेना (उद्धव ठाकरे) सांसद संजय राउत ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इसे अमानवीय और असंवेदनशील करार देते हुए कहा कि शोक की घड़ी में राजनीति नहीं होनी चाहिए।
नेतृत्व की चर्चा पर क्यों भड़के संजय राउत
संजय राउत ने कहा कि जिस परिवार ने अपना मुखिया खोया है, उसकी पीड़ा अभी ताजा है। ऐसे समय में सत्ता और पद की चर्चा करना मानवता के खिलाफ है। राउत ने स्पष्ट किया कि यदि किसी मंत्री या विधायक ने यह मुद्दा उठाया है, तो उसमें संवेदनशीलता का अभाव है। उन्होंने कहा, “अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार का दुख अभी आंखों में है, ऐसे वक्त में राजनीति करना सही नहीं है।”
कैसे शुरू हुई कैबिनेट और नेतृत्व की बहस
अजित पवार के निधन के एक दिन बाद ही एनसीपी के कुछ नेताओं ने सुनेत्रा पवार को राज्य मंत्रिमंडल में शामिल करने की मांग उठाई। कुछ नेताओं ने सुझाव दिया कि पार्टी की कमान उन्हें सौंपी जाए।
इस समय एनसीपी भाजपा नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन का हिस्सा है। सुनेत्रा पवार पहले बारामती से लोकसभा चुनाव हार चुकी हैं और फिलहाल राज्यसभा सांसद हैं, जबकि अजित पवार बारामती से विधायक थे।
राजनीतिक माहौल में बढ़ी हलचल
संजय राउत ने इस पूरे विवाद को समय से पहले और अनुचित बताया। उन्होंने कहा कि किसी नेता के निधन के तुरंत बाद उत्तराधिकारी तय करने की होड़ राजनीतिक असंवेदनशीलता को दर्शाती है। इसके साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि जल्दबाजी से पार्टी और राज्य में अनावश्यक तनाव बढ़ सकता है।
अजित पवार के बाद एनसीपी में बदलाव
अजित पवार के निधन से एनसीपी में नेतृत्व का बड़ा खालीपन।
पार्टी में भविष्य को लेकर अलग-अलग राय और चिंता।
कुछ नेताओं द्वारा सुनेत्रा पवार को कैबिनेट में लाने की मांग।
एनसीपी और एनसीपी (शरद पवार) के संभावित विलय की चर्चाएं।
महाराष्ट्र की राजनीति में नए समीकरणों की अटकलें तेज।
विलय की अटकलें और आगे का रास्ता
अजित पवार के निधन के बाद एनसीपी और शरद पवार नेतृत्व वाली एनसीपी (शरदचंद्र पवार) के विलय की चर्चाएं फिर तेज हो गई हैं। हालांकि अभी तक कोई औपचारिक फैसला सामने नहीं आया।
संजय राउत ने कहा कि ऐसे फैसलों के लिए समय, संयम और परिपक्वता जरूरी है। फिलहाल प्राथमिकता शोक संतप्त परिवार के साथ खड़े रहने और राजनीतिक संयम दिखाने की होनी चाहिए।




